राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख बनवीर सिंह ने कहा कि समाज के सभी वर्गों तक शिक्षा पहुँचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज के जागरूक लोगों को भी अपनी क्षमता के अनुसार इस कार्य में योगदान देना चाहिए। उन्होंने शिक्षा को एक सामूहिक प्रयास बताया।
उन्होंने कहा कि जीवन में मनुष्यता के संस्कार घर से शुरू होते हैं। परिवार बच्चों को कर्तव्य और अकर्तव्य का अंतर समझाता है। माता-पिता और बुजुर्ग अपने व्यवहार से बच्चों को धैर्य, साहस और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाते हैं। इसलिए परिवार को संस्कार निर्माण का पहला केंद्र माना जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि नई और पुरानी पीढ़ी के बीच संवाद बेहद जरूरी है। इसी संवाद से समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। इससे व्यक्ति में राष्ट्रीय चरित्र, मूल्य, श्रम के प्रति सम्मान और समाज के प्रति आत्मीयता जैसे गुण पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि कुटुंब प्रबोधन इस प्रक्रिया को मजबूत बनाता है।
बनवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अर्थ केवल विद्यालय तक सीमित नहीं है। घर-परिवार का वातावरण भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। बच्चे अपने माता-पिता और आसपास के वरिष्ठ लोगों के व्यवहार से करुणा, संवेदनशीलता और मानवीयता की सीख लेते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज की अगली पीढ़ी के निर्माण का आधार बनती है। इस प्रक्रिया में धर्म और संस्कृति की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। शिक्षा व्यक्ति को अपनी जड़ों से जोड़ती है और उसे समाज के प्रति जिम्मेदार बनाती है।
उन्होंने मातृभाषा के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो व्यक्ति में मातृभाषा के प्रति स्वाभिमान पैदा करे। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह संस्कृति और परंपरा की वाहक भी होती है।
बनवीर सिंह ने कहा कि शिक्षा को समाज, संस्कृति और प्रकृति से जोड़ना जरूरी है। व्यक्ति को अपनी भूमि, जल, जंगल और जीव-जंतुओं के प्रति आत्मीयता का भाव सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब समाज में ऐसी शिक्षा विकसित होगी, तब वह दुनिया को भी आत्मीयता और सह-अस्तित्व का संदेश दे सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यक्ति में आत्मगौरव की भावना पैदा करे। ऐसी शिक्षा समाज को मजबूत बनाती है और राष्ट्र के विकास में योगदान देती है।
बनवीर सिंह चंडीगढ़ के केशव निवास में आयोजित एक प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में शिक्षा विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के विचारों के संकलन “भारतीय शिक्षा दृष्टि” के पंजाबी अनुवाद का लोकार्पण किया गया।
इस पुस्तक का संकलन रवि कुमार ने किया है। विद्या भारती पंजाब ने इसके प्रकाशन में सहयोग दिया। कार्यक्रम में बनवीर सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ध्रुव कन्या शुक्ला ने की। वहीं विद्या भारती के उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री विजय नड्डा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी।
इस अवसर पर विद्या भारती पंजाब के प्रांत संगठन मंत्री राजेंद्र, संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख अजय और चंडीगढ़ विभाग कार्यवाह एडवोकेट बलजिंदर सिंह भी उपस्थित रहे। इसके अलावा विद्या भारती संपर्क विभाग के सदस्य रमेश अरोड़ा, परवीन गुप्ता, मनीष शर्मा और करमजीत परमार भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने शिक्षा को समाज और संस्कृति से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से ही ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित हो सकती है जो आने वाली पीढ़ियों के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।