कमर्शियल LPG संकट: आपूर्ति समस्या पर सरकार ने बनाई समिति, होटल-रेस्तरां सेक्टर चिंतित

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देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की अचानक कमी ने होटल और रेस्तरां उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। इसी स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक विशेष समिति बनाई है। यह समिति आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं की जांच करेगी और समाधान सुझाएगी।

सबसे पहले मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि तेल विपणन कंपनियों के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक समिति गठित की गई है। यह समूह होटल, रेस्तरां और अन्य उद्योगों की ओर से आई शिकायतों की समीक्षा करेगा। साथ ही यह तय करेगा कि सीमित आपूर्ति के बीच विभिन्न क्षेत्रों में गैस का वितरण कैसे किया जाए।

दरअसल, इस संकट की पृष्ठभूमि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। हाल के हफ्तों में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष तेज हुआ है। इस टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसी कारण कई ईंधन आपूर्ति मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ गई है।

भारत भी इस स्थिति से अछूता नहीं है। देश हर साल करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी का उपयोग करता है। इस कुल खपत का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा घरेलू रसोई गैस में जाता है। बाकी गैस होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में इस्तेमाल होती है।

हालांकि भारत अपनी पूरी जरूरत घरेलू उत्पादन से पूरी नहीं कर पाता। देश को करीब 62 प्रतिशत एलपीजी आयात करना पड़ता है। इन आयातों का बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी क्षेत्र से आता है।

यहीं समस्या और बढ़ गई है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बढ़ गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। भारत अपने एलपीजी आयात का लगभग 85 से 90 प्रतिशत इसी रास्ते से प्राप्त करता रहा है।

जब इस मार्ग पर जोखिम बढ़ा, तब आपूर्ति प्रभावित होने लगी। परिणामस्वरूप सरकार ने उपलब्ध गैस को प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित किया। इससे घरों में रसोई गैस की आपूर्ति जारी रह सके।

लेकिन इस फैसले का असर कमर्शियल उपभोक्ताओं पर पड़ा। होटल और रेस्तरां बाजार मूल्य पर मिलने वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। अब उन्हें गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस संकट का असर बड़े शहरों में दिखने लगा है। मुंबई और बेंगलुरु में कई होटल और रेस्तरां को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ प्रतिष्ठानों ने गैस बचाने के लिए संचालन सीमित करना शुरू कर दिया है।

इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय शेट्टी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि गैस की कमी तेजी से फैल रही है। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो कई रेस्तरां को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।

हालांकि सरकार का कहना है कि देश के पास कुल मिलाकर पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है। मंत्रालय के अनुसार मौजूदा समस्या मुख्य रूप से आपूर्ति प्रबंधन से जुड़ी है।

इसी बीच सरकार ने कुछ तात्कालिक कदम भी उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके लिए पेट्रोकेमिकल उत्पादन का कुछ हिस्सा कम करके गैस उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।

इसके साथ ही घरेलू गैस बुकिंग के नियमों में बदलाव किया गया है। पहले उपभोक्ता 21 दिनों के अंतराल पर नया सिलेंडर बुक कर सकते थे। अब यह अवधि बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आयातित एलपीजी की सीमित आपूर्ति पहले आवश्यक संस्थानों को दी जाएगी। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।

फिलहाल सरकार वैकल्पिक आयात स्रोत भी तलाश रही है। ऊर्जा कंपनियां नए आपूर्तिकर्ताओं और मार्गों की जांच कर रही हैं ताकि आपूर्ति स्थिर रखी जा सके।

कुल मिलाकर, कमर्शियल एलपीजी की कमी ने आतिथ्य उद्योग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबकी नजर सरकार की बनाई समिति पर है, जो इस संकट का स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश करेगी।


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