सऊदी और कुवैत पर ईरानी ड्रोन हमले, पश्चिम एशिया में 40 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द

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पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। मंगलवार सुबह ईरान ने सऊदी अरब और कुवैत की दिशा में कई ड्रोन भेजे। इस कदम ने पहले से चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष को और गंभीर बना दिया। पिछले कुछ हफ्तों से ईरान, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

सबसे पहले सऊदी अरब ने अपनी प्रतिक्रिया दी। सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने दो ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। इसके तुरंत बाद कुवैत ने भी कार्रवाई की। कुवैती सुरक्षा बलों ने छह ड्रोन नष्ट किए। अधिकारियों ने कहा कि इन ड्रोन को समय रहते रोक लिया गया, इसलिए कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

हालांकि इन हमलों का असर पूरे क्षेत्र पर दिखने लगा है। सुरक्षा खतरे के कारण पश्चिम एशिया में अब तक 40 हजार से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। एयरलाइंस भी जोखिम को देखते हुए कई मार्गों पर उड़ानें रोक रही हैं।

इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात ने भी स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। यूएई ने कहा कि इस युद्ध में उसे “अनुचित तरीके से निशाना” बनाया जा रहा है। हालांकि देश ने साफ किया कि वह ईरान के खिलाफ किसी हमले में भाग नहीं लेगा।

संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा कार्यालय में यूएई के राजदूत जमाल अल मुशरख ने कहा कि उनका देश संघर्ष को बढ़ाना नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि यूएई किसी भी तरह के टकराव में खिंचना नहीं चाहता और क्षेत्र में स्थिरता चाहता है।

दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया ने यूएई की मदद का फैसला किया है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार मध्य पूर्व में एक निगरानी विमान भेजेगी। इसके साथ ही वह यूएई को उन्नत एयर-टू-एयर मिसाइलें भी उपलब्ध कराएगी। ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि इससे स्थानीय हवाई क्षेत्र सुरक्षित रहेगा और वहां फंसे नागरिकों की वापसी आसान होगी।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि ईरान के हमलों के बाद यूएई ने अब तक 1,500 से ज्यादा रॉकेट और ड्रोन मार गिराए हैं। दोनों नेताओं ने कहा कि इस तरह के हमले क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाते हैं और आम नागरिकों के लिए खतरा पैदा करते हैं।

हालांकि सुरक्षा तनाव के बीच दुबई में दैनिक जीवन अभी सामान्य दिख रहा है। वहां सुपरमार्केट की अलमारियां भरी हुई हैं। खाद्य क्षेत्र मजबूत लॉजिस्टिक्स प्रणाली पर निर्भर है। यही व्यवस्था महामारी और 2024 की भीषण बाढ़ के दौरान भी काम आई थी।

फिर भी कंपनियां अब आपूर्ति मार्गों में बदलाव कर रही हैं। कुछ सामान अब समुद्री रास्ते की बजाय हवाई या सड़क मार्ग से पहुंचाया जा रहा है। यूएई सरकार ने भी लोगों को भरोसा दिया है कि देश के पास कई महीनों का खाद्य भंडार मौजूद है। साथ ही प्रशासन कीमतों पर नजर रख रहा है।

इसके बावजूद चिंता बनी हुई है। हाल के दिनों में दुबई सहित कई खाड़ी शहरों पर ईरानी ड्रोन और मिसाइलें गिरी हैं। ईरान ने इन हमलों को अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाइयों का जवाब बताया है।

इस संघर्ष का असर समुद्री व्यापार पर भी पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, अब अस्थिर हो गया है। कई जहाज इस मार्ग से गुजरने से बच रहे हैं। नतीजतन वैश्विक तेल बाजार में भी हलचल बढ़ गई है।

कई व्यापारिक जहाज रास्ते में अटक गए हैं। भारतीय चावल, ऑस्ट्रेलियाई मांस और इंडोनेशियाई कॉफी लेकर चल रहे जहाज अभी आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

इसी बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया। बहरीन में एक बड़े पेट्रोलियम परिसर पर हमला हुआ। अल मामीर तेल सुविधा में आग लग गई और वहां नुकसान हुआ।

इसके बाद बहरीन की सरकारी ऊर्जा कंपनी बापको ने फोर्स मेज्योर घोषित किया। यह कानूनी कदम कंपनियों को युद्ध जैसी असाधारण परिस्थितियों में अनुबंधों से राहत देता है। इस फैसले ने बाजार में चिंता और बढ़ा दी।

उधर अमेरिका ने युद्ध के संभावित अंत का संकेत दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है। उन्होंने फ्लोरिडा में पत्रकारों से कहा कि युद्ध “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है, हालांकि उन्होंने कोई समयसीमा नहीं बताई।

लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस बयान का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, इसका फैसला ईरान करेगा, अमेरिका नहीं।

इसी बीच ईरान के भीतर भी नेतृत्व में बदलाव हुआ है। सप्ताहांत में देश के धार्मिक नेतृत्व ने मारे गए सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बेटे को नया प्रमुख चुना।

फिलहाल पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है। ड्रोन हमले, ऊर्जा संकट और कूटनीतिक बयानबाजी मिलकर इस संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।


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