राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार सतर्क, जयशंकर का बयान

0
Jaishankar Rajya Sabha

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में कहा कि सरकार देश की ऊर्जा जरूरतों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी साफ किया कि हर फैसले में राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा।

सबसे पहले जयशंकर ने ऊर्जा खरीद की नीति पर सरकार का दृष्टिकोण बताया। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा आयात के मामले में लागत, जोखिम और आपूर्ति की उपलब्धता जैसे कारकों को ध्यान में रखता है। सरकार इन तीनों पहलुओं का संतुलन बनाकर निर्णय लेती है।

इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय नागरिकों का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संसद में कहा कि भारत किसी भी वैश्विक संकट के बीच अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।

दरअसल पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्षेत्र में तेल उत्पादन और समुद्री आपूर्ति मार्गों पर दबाव बढ़ा है। इस स्थिति ने दुनिया के कई देशों में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

इसी पृष्ठभूमि में सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है। सरकार ने बाजार और आम उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि फिलहाल भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर कोई तत्काल खतरा नहीं है।

इससे पहले पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी इसी विषय पर बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि भारत के पास मौजूदा हालात से निपटने के लिए पर्याप्त तेल भंडार मौजूद हैं। सरकार ने आपात स्थिति के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी बनाए हुए हैं।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार देश में इस समय कच्चे तेल और ईंधन के पर्याप्त भंडार उपलब्ध हैं। इसके अलावा रणनीतिक भंडार भी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाते हैं। इन भंडारों का उद्देश्य किसी भी वैश्विक संकट के दौरान आपूर्ति को बनाए रखना है।

इसी के साथ सरकार ने निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशभर में ईंधन की उपलब्धता और भंडार की स्थिति पर नजर रखने के लिए 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया है। यह प्रणाली आपूर्ति से जुड़ी किसी भी समस्या पर तुरंत प्रतिक्रिया देने में मदद करेगी।

ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में खाड़ी क्षेत्र की अहम भूमिका है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है। देश हर दिन लगभग पांच मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल आयात करता है।

इनमें से लगभग आधी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और वैश्विक तेल परिवहन का एक महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

हालांकि भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने तेल आयात के स्रोतों को विविध बनाया है। अब भारत अपनी जरूरत का तेल कई अलग-अलग क्षेत्रों से खरीदता है।

वर्तमान में भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है। इनमें उत्तरी अमेरिका, लैटिन अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और रूस के एशियाई हिस्से जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इस विविधता से भारत की किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाती है। अगर किसी एक क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होती है, तो दूसरे स्रोत उस कमी को पूरा कर सकते हैं।

कुल मिलाकर सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। साथ ही भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए कई स्तरों पर तैयारी बनाए हुए है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *