तेल झटके और खाड़ी संकट से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 2000 अंक से ज्यादा टूटा

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सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए झटकेदार रही। सोमवार सुबह बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसी वजह से दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए तेजी से शेयर बेचे।

सबसे पहले वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों ने दबाव बनाया। ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते संघर्ष ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई। इसी बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। इस उछाल ने कई अर्थव्यवस्थाओं को झटका दिया, खासकर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को।

इस माहौल में भारतीय शेयर बाजार खुलते ही गिरावट में चला गया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 2,444 अंकों से ज्यादा टूटकर लगभग 76,474 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी50 करीब 730 अंक गिरकर 23,720 के आसपास कारोबार करता नजर आया। बाजार की इस तेज गिरावट ने निवेशकों में घबराहट का माहौल बना दिया।

बाजार विशेषज्ञों ने तेल की कीमतों को इस गिरावट की बड़ी वजह बताया। निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ाता है। यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो भारत जैसे देशों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। कंपनियों की लागत बढ़ती है और इसका असर पूरे बाजार पर पड़ता है। ऐसे हालात में निवेशक सतर्क रुख अपनाते हैं और बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है।

सोमवार को बाजार खुलते ही लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट दिखी। हालांकि कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों पर असर अपेक्षाकृत कम रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में मामूली गिरावट आई और यह लगभग स्थिर बना रहा। आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों में भी सीमित कमजोरी देखी गई। इंफोसिस करीब 0.89 प्रतिशत गिरा, जबकि टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में करीब एक प्रतिशत की गिरावट रही। सन फार्मा भी लगभग एक प्रतिशत नीचे आया।

दूसरी ओर कई शेयरों में तेज गिरावट दर्ज हुई। इंडसइंड बैंक के शेयर सबसे ज्यादा टूटे और करीब 7.5 प्रतिशत गिर गए। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में भी पांच प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो लगभग पांच प्रतिशत नीचे आ गई। टाटा स्टील और मारुति सुजुकी के शेयर भी चार प्रतिशत से ज्यादा फिसल गए। इन गिरावटों ने बाजार की व्यापक कमजोरी को साफ दिखाया।

इस बीच विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने भी बाजार पर असर डाला। विश्लेषकों के अनुसार फरवरी में थोड़ी खरीदारी के बाद विदेशी निवेशकों ने फिर से बिकवाली तेज कर दी है। युद्ध की अवधि को लेकर अनिश्चितता के कारण वैश्विक फंड फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

बाजार में अस्थिरता भी तेजी से बढ़ी। डर और अनिश्चितता को मापने वाला इंडिया VIX करीब 21 प्रतिशत उछल गया। यह संकेत देता है कि निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर चिंता बढ़ रही है।

बड़े शेयरों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी भारी दबाव दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक करीब 3 प्रतिशत गिरा। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी लगभग इतनी ही गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा।

सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में नजर आए। ऑटो सेक्टर में करीब चार प्रतिशत गिरावट आई। वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयर तीन प्रतिशत से ज्यादा टूटे। मीडिया, मेटल और रियल्टी सेक्टर में भी तेज गिरावट दर्ज हुई। खासकर पीएसयू बैंक इंडेक्स में पांच प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई।

हालांकि विशेषज्ञों ने निवेशकों को धैर्य रखने की सलाह दी। उनका कहना है कि भू-राजनीतिक संकट आमतौर पर बाजारों में अल्पकालिक दबाव लाते हैं। लंबी अवधि में मजबूत कंपनियां फिर से उभरती हैं।

विश्लेषकों के अनुसार घरेलू मांग से जुड़े सेक्टर जैसे बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम और सीमेंट पर संकट का असर सीमित रह सकता है। वहीं रक्षा और फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं। इसलिए लंबी अवधि के निवेशक गिरावट के दौरान अच्छे शेयरों में धीरे-धीरे निवेश पर विचार कर सकते हैं।


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