अहमदाबाद के मैदान पर रविवार को क्रिकेट इतिहास का यादगार अध्याय लिखा गया। भारत ने वर्ल्ड कप फाइनल में ऐसी आक्रामक क्रिकेट दिखाई कि मुकाबला जल्द ही एकतरफा बन गया। शुरुआत से ही भारतीय टीम ने साफ संकेत दे दिया कि वह सुरक्षित खेल नहीं खेलेगी। टीम ने हमला चुना और उसी रास्ते पर अंत तक डटी रही।
सबसे पहले ओपनर अभिषेक शर्मा ने मंच तैयार किया। 24 साल के इस बल्लेबाज पर भारी दबाव था। पूरे टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन पर लगातार चर्चा होती रही। लेकिन फाइनल में उन्होंने अलग ही अंदाज दिखाया। अभिषेक ने क्रीज पर कदम रखते ही आत्मविश्वास दिखाया और गेंदबाजों पर हमला शुरू कर दिया।
दूसरी ओर संजू सैमसन ने शुरुआत में संयम रखा। उन्होंने स्ट्राइक रोटेट की और अभिषेक को खुलकर खेलने का मौका दिया। हालांकि कुछ ही देर बाद सैमसन भी लय में आ गए। दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर पावरप्ले को भारत के पक्ष में बदल दिया।
तीसरे ओवर में अभिषेक शर्मा ने आक्रमण तेज किया। उन्होंने न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन पर जोरदार प्रहार किया। फर्ग्यूसन के एक ओवर में 24 रन बने। स्टेडियम में बैठे हजारों दर्शक उत्साह से झूम उठे।
अभिषेक का खेल पूरी तरह निडर नजर आया। उन्होंने हर गेंद को सीमा रेखा के पार भेजने की कोशिश की। सिर्फ 21 गेंदों में उन्होंने 52 रन बना दिए। इस पारी में छह चौके और तीन छक्के शामिल रहे। हालांकि रचिन रवींद्र ने आखिरकार उन्हें आउट किया, लेकिन तब तक भारत मजबूत शुरुआत हासिल कर चुका था।
इसके बाद संजू सैमसन ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने पहले अपनी अर्धशतकीय पारी पूरी की और फिर आक्रामक अंदाज अपनाया। सैमसन ने पुल, कट और लॉन्ग शॉट्स के जरिए गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास और नियंत्रण दोनों दिखे।
इसी दौरान ईशान किशन क्रीज पर आए। उन्होंने आते ही न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर हमला बोल दिया। ईशान ने कई शानदार चौके और छक्के लगाए। सैमसन और किशन की साझेदारी ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।
दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर सिर्फ 48 गेंदों में 105 रन जोड़ दिए। इस साझेदारी ने न्यूजीलैंड की गेंदबाजी को बुरी तरह तोड़ दिया। मैदान में फील्डर पीछे खड़े थे, लेकिन गेंद बार-बार सीमा रेखा पार कर रही थी।
16वें ओवर में सैमसन 46 गेंदों में 89 रन बनाकर आउट हुए। उनकी पारी में आठ चौके और पांच छक्के शामिल रहे। उसी ओवर में ईशान किशन भी 25 गेंदों में 54 रन बनाकर पवेलियन लौटे। भारत ने तब तक विशाल स्कोर की नींव रख दी थी।
अंतिम ओवरों में शिवम दुबे ने जोरदार योगदान दिया। दुबे ने सिर्फ आठ गेंदों में 26 रन बनाए। उन्होंने तीन चौके और दो बड़े छक्के लगाए। उनकी तेज पारी ने भारत को 20 ओवर में 255 रन तक पहुंचा दिया।
न्यूजीलैंड के सामने बड़ा लक्ष्य था, लेकिन भारत के गेंदबाजों ने शुरुआत से दबाव बनाया। जसप्रीत बुमराह ने पहले ही गेंद पर रचिन रवींद्र को आउट कर दिया। इस विकेट ने न्यूजीलैंड की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया।
इसके बाद बुमराह ने अपने अगले स्पेल में दो और विकेट लिए। उनकी सटीक गेंदबाजी के सामने न्यूजीलैंड के बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आए। अहमदाबाद की भीड़ ने जल्द ही जीत का जश्न शुरू कर दिया।
इस जीत के साथ भारत ने वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया। टीम ने निडर बल्लेबाजी और अनुशासित गेंदबाजी का शानदार प्रदर्शन किया। यह जीत भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक पल बन गई और करोड़ों प्रशंसकों को गर्व का नया कारण मिला।