ईरान के हमले से बहरीन की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी में आग, पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा
khabarworld 09/03/2026 0
पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। कई देशों में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। संघर्ष अब दूसरे सप्ताह में पहुंच चुका है। अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए। इसके बाद ईरान ने क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई तेज कर दी।
सोमवार को बहरीन में बड़ा हमला हुआ। राजधानी मनामा के पास सित्रा इलाके में स्थित बहरीन पेट्रोलियम कंपनी यानी BAPCO की रिफाइनरी के आसपास घना धुआं उठता दिखा। प्रत्यक्षदर्शियों ने आसमान में काले धुएं के गुबार देखे। इसके तुरंत बाद बहरीन सरकार ने बयान जारी किया। अधिकारियों ने बताया कि सित्रा इलाके में ईरानी ड्रोन हमले से नुकसान हुआ और कई लोग घायल हुए। यह रिफाइनरी देश की सबसे बड़ी तेल प्रोसेसिंग इकाई है, इसलिए इस हमले ने खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी।
इस बीच ईरान ने खाड़ी देशों की ओर हमले जारी रखे। सऊदी अरब ने भी सोमवार को कई ड्रोन खतरों की जानकारी दी। सऊदी वायुसेना ने शायबा तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे चार ड्रोन को ट्रैक किया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई की और रुब अल-खाली रेगिस्तान के ऊपर ही इन ड्रोन को मार गिराया। अधिकारियों के अनुसार ये ड्रोन तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे।
सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इससे पहले भी कई हमलों को नाकाम किया। अधिकारियों ने बताया कि बैलिस्टिक मिसाइलें प्रिंस सुल्तान एयरबेस की ओर बढ़ रही थीं। वहीं कुछ ड्रोन राजधानी रियाद की तरफ आए। लेकिन सऊदी रक्षा प्रणाली ने सभी खतरों को समय रहते रोक दिया।
उधर कतर में भी सुरक्षा अलर्ट जारी हुआ। कतर के गृह मंत्रालय ने पहले संभावित खतरे की चेतावनी दी। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सशस्त्र बलों ने एक मिसाइल को रास्ते में ही रोक दिया। अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी।
इसी दौरान संयुक्त अरब अमीरात भी सतर्क हो गया। रक्षा अधिकारियों ने बताया कि रडार सिस्टम ने एक मिसाइल का पता लगाया। इसके बाद वायु रक्षा प्रणाली ने तुरंत कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा प्रणाली ने खतरे को नियंत्रित कर लिया।
दूसरी ओर इज़राइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान तेज कर दिया। इज़राइली सेना ने मध्य ईरान में कई नए हमले किए। साथ ही लड़ाकू विमानों ने लेबनान की राजधानी बेरूत में भी कुछ ठिकानों को निशाना बनाया। इज़राइल का दावा है कि ये ठिकाने हिज़्बुल्लाह से जुड़े थे और ईरान समर्थित गतिविधियों का हिस्सा थे।
इसी बीच ईरान के अंदर भी बड़ा राजनीतिक फैसला हुआ। ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना। मोजतबा खामेनेई, दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं। सरकारी प्रसारक IRIB ने इस फैसले की पुष्टि की।
इसके तुरंत बाद ईरान ने सैन्य कार्रवाई का नया चरण शुरू किया। ईरानी मीडिया ने बताया कि नए सुप्रीम लीडर के नेतृत्व में पहली मिसाइल लहर “कब्जे वाले इलाकों” की ओर दागी गई।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने भी नए नेता के प्रति वफादारी जताई। कई वरिष्ठ नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया। न्यायपालिका प्रमुख गोलामहुसैन मोहसेनी एजई ने इसे उम्मीद और खुशी का क्षण बताया। वहीं वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने चुनाव को पूरी तरह कानूनी बताया।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेज रही। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए ईरानी नेता की आलोचना की। ट्रंप ने उन्हें कमजोर नेता बताया और कहा कि उन्हें लंबे समय तक टिकना मुश्किल होगा। इज़राइल ने भी चेतावनी दी कि वह किसी भी ऐसे उत्तराधिकारी को निशाना बनाएगा जो ईरान की आक्रामक नीति जारी रखेगा।
इसी दौरान इज़राइली सेना ने एक और बड़ा दावा किया। सेना ने कहा कि उसने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड एयर फोर्स के मुख्यालय को निशाना बनाया। इज़राइल के अनुसार यही केंद्र बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन नेटवर्क और वायुसेना की अन्य इकाइयों का संचालन करता था।
इज़राइल ने संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान में लगातार हवाई हमले किए हैं। सैन्य अधिकारियों के अनुसार सिर्फ रविवार को ही 140 से ज्यादा ठिकानों पर हमले हुए। इज़राइली सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने कहा कि यह संघर्ष लंबा चल सकता है और इसके लिए धैर्य और तैयारी की जरूरत होगी।
उधर अमेरिका ने भी सुरक्षा कदम उठाए। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब में तैनात गैर-आपातकालीन दूतावास कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया। अधिकारियों ने सुरक्षा जोखिम बढ़ने का हवाला दिया।
दरअसल पिछले सप्ताह रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर के पास ड्रोन हमला हुआ था। इसके अलावा कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कुछ कूटनीतिक मिशनों पर भी खतरे की घटनाएं सामने आई थीं।
इस तरह पश्चिम एशिया में संघर्ष का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। सैन्य हमले, राजनीतिक बदलाव और सुरक्षा अलर्ट पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना रहे हैं। क्षेत्र के कई देश अब संभावित बड़े टकराव के लिए तैयारियां कर रहे हैं।
