पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड: हाई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को बरी किया
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने खुले अदालत में फैसला सुनाया। इस पीठ की अगुवाई मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने की। उनके साथ न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल भी मौजूद रहे।
अदालत ने राम रहीम के खिलाफ ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। हालांकि, अदालत ने मामले में कम से कम दो अन्य आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध रहने दिया। अदालत ने कहा कि वह फैसले के पीछे का विस्तृत कारण बाद में लिखित आदेश में जारी करेगी।
इससे पहले 17 जनवरी 2019 को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और तीन अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। अदालत ने सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही प्रत्येक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
इसके बाद राम रहीम और अन्य आरोपियों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। उन्होंने अदालत में दावा किया कि जांच एजेंसियों ने उन्हें झूठा फंसाया। अब हाई कोर्ट ने राम रहीम को राहत दे दी है।
दरअसल, यह मामला 24 अक्टूबर 2002 से जुड़ा है। उस दिन अज्ञात हमलावरों ने सिरसा स्थित घर के बाहर रामचंद्र छत्रपति को बेहद करीब से गोली मार दी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई।
इस हत्या ने उस समय पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। छत्रपति एक स्थानीय अखबार चलाते थे। उन्होंने अपने अखबार में एक गुमनाम पत्र प्रकाशित किया था। उस पत्र में डेरा सच्चा सौदा के भीतर महिलाओं के शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
पत्र में दावा किया गया कि डेरे में रहने वाली साध्वियों के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म हुआ। इन आरोपों के बाद मामला काफी चर्चित हो गया। बाद में जांच एजेंसियों ने हत्या के मामले में राम रहीम और उनके सहयोगियों पर शक जताया।
इसी आधार पर जांच आगे बढ़ी और सीबीआई ने मामला दर्ज किया। कई साल तक सुनवाई चलती रही। अंततः 2019 में ट्रायल कोर्ट ने दोष सिद्ध माना और सजा सुनाई।
हालांकि, कानूनी लड़ाई यहीं खत्म नहीं हुई। आरोपियों ने हाई कोर्ट में फैसले को चुनौती दी। अब हाई कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया।
इस बीच राम रहीम पहले से ही जेल में सजा काट रहे हैं। 2017 में एक विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें 20 साल की सजा सुनाई। फिलहाल उन्हें हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में रखा गया है।
उनकी 2017 की सजा के बाद हरियाणा में बड़े पैमाने पर हिंसा भी हुई थी। पंचकूला और आसपास के कई शहरों में उनके समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ। इस हिंसा में 40 से अधिक लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए।
इसके अलावा मई 2024 में हाई कोर्ट ने उन्हें डेरे के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी बरी कर दिया। वहीं, पंजाब में 2015 के बेअदबी मामलों से जुड़ी कई एफआईआर में उनका नाम अब भी दर्ज है और जांच जारी है।
उधर इस साल जनवरी में उन्हें 40 दिन की पैरोल भी मिली थी। यह पहली बार नहीं था जब उन्हें अस्थायी रिहाई मिली। पहले भी उनकी पैरोल को लेकर राजनीतिक विवाद और सुरक्षा चिंताएं सामने आती रही हैं।
इस तरह हाई कोर्ट का यह फैसला लंबे समय से चल रहे इस चर्चित मामले में एक अहम कानूनी मोड़ बनकर सामने आया है।
