आईरिस डेना हमले के बाद श्रीलंका के पास ईरानी जहाज़ ने मांगी ‘तत्काल पोर्ट कॉल’ की अनुमति

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हिंद महासागर में तनाव अचानक बढ़ गया। श्रीलंका के पास मौजूद एक ईरानी जहाज़ ने तत्काल पोर्ट कॉल की अनुमति मांगी। यह अनुरोध उस हमले के एक दिन बाद आया, जिसमें अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत आईरिस डेना को डुबो दिया।

श्रीलंका के सांसद नमल राजपक्षे ने गुरुवार को इस जानकारी को सार्वजनिक किया। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को सूचना मिली कि एक और ईरानी जहाज़ श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र के भीतर मौजूद है। हालांकि वह अभी श्रीलंका की क्षेत्रीय समुद्री सीमा के बाहर ही है।

राजपक्षे ने कहा कि जहाज़ ने सरकार से तुरंत किसी बंदरगाह पर आने की अनुमति मांगी है। लेकिन सरकार ने अभी तक मंजूरी नहीं दी। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। साथ ही उन्होंने कहा कि अधिकारी इस अनुरोध की समीक्षा कर रहे हैं।

इससे पहले श्रीलंका के मीडिया मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने भी एक दूसरे ईरानी युद्धपोत की मौजूदगी की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा कि जहाज़ श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र के पास है। हालांकि उन्होंने इस बारे में अधिक विवरण नहीं दिया।

इसी बीच बुधवार, 4 मार्च को हिंद महासागर में एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम हुआ। अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के फ्रिगेट IRIS देना पर हमला किया। पनडुब्बी ने जहाज़ को टॉरपीडो से निशाना बनाया और उसे डुबो दिया।

यह युद्धपोत हाल ही में भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित नौसैनिक अभ्यास से लौटा था। अभ्यास के बाद जहाज़ हिंद महासागर में श्रीलंका के पास से गुजर रहा था। उसी दौरान यह हमला हुआ।

हमले में भारी जनहानि हुई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार करीब 87 लोगों की मौत हुई। घटना के बाद श्रीलंका के अधिकारियों ने समुद्र में खोज और बचाव अभियान शुरू किया।

बचाव दल ने 32 नाविकों को समुद्र से सुरक्षित निकाला। हालांकि कई नाविक अभी भी लापता हैं। अधिकारियों को आशंका है कि वे समुद्र में डूब गए।

यह हमला ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ। पिछले कुछ दिनों में पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हुआ है। अब इसके असर हिंद महासागर तक दिखने लगे हैं।

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई वाशिंगटन के लिए बड़ी जीत है।

हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सेना ने यह ऑपरेशन सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  के निर्देश पर चलाया। उन्होंने बताया कि सेना ने शनिवार सुबह यह कार्रवाई शुरू की।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस अभियान को इज़राइल के साथ मिलकर आगे बढ़ाएगा। उनका दावा है कि अमेरिका इस संघर्ष में निर्णायक बढ़त बना रहा है।

इस बीच श्रीलंका के सामने नई कूटनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। हिंद महासागर वैश्विक समुद्री व्यापार का अहम मार्ग है। इसलिए इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधि क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।

अब कोलंबो सरकार को सावधानी से फैसला लेना होगा। एक तरफ मानवीय जरूरतों को देखते हुए जहाज़ को बंदरगाह देने का दबाव हो सकता है। दूसरी तरफ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव भी फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल ईरानी जहाज़ श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र के बाहर इंतजार कर रहा है। वहीं सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। हिंद महासागर में हालात तेजी से बदलते दिख रहे हैं।


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