ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत ने आधिकारिक रूप से शोक व्यक्त किया। नई दिल्ली ने कूटनीतिक माध्यमों से ईरान के प्रति संवेदना प्रकट की। इसी क्रम में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी गुरुवार को दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे। वहां उन्होंने भारत सरकार की ओर से संवेदना पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए।
दरअसल 28 फरवरी को एक संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली हवाई हमले में खामेनेई की मौत हुई। इस घटना ने पश्चिम एशिया में तनाव को तेजी से बढ़ा दिया। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं और कई देशों की चिंता बढ़ गई।
भारत और ईरान के संबंध लंबे समय से कूटनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्तर पर मजबूत रहे हैं। इसलिए खामेनेई की मौत के बाद नई दिल्ली ने संतुलित और औपचारिक प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी।
इस बीच संघर्ष का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्टों के अनुसार श्रीलंका के समुद्री तट के पास अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाया। इस घटना ने संकेत दिया कि टकराव अब पश्चिम एशिया से बाहर भी असर डाल रहा है।
उधर काकेशस क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया। अज़रबैजान ने एक हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले के बाद कड़ी चेतावनी दी। अधिकारियों ने कहा कि यह हमला बिना जवाब के नहीं रहेगा। साथ ही उन्होंने जवाबी कार्रवाई की तैयारी की बात भी कही। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने आशंका जताई कि संघर्ष में नए देश भी शामिल हो सकते हैं।
इस युद्ध में जनहानि भी लगातार बढ़ रही है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक एक हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इन मृतकों में सैनिकों के साथ-साथ आम नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि स्वतंत्र रूप से इन आंकड़ों की पुष्टि करना अभी मुश्किल बना हुआ है।
ईरान की राजधानी तेहरान में भी हमलों के असर दिखे। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हालिया हमलों में शहर के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा। एक खेल परिसर, फुटबॉल स्टेडियम, नगरपालिका भवन और कई दुकानों के सामने के हिस्से क्षतिग्रस्त हुए। इन हमलों के बाद नागरिकों में चिंता और अनिश्चितता बढ़ी।
इसी बीच कई देशों ने संयम और कूटनीतिक समाधान की अपील की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
भारत ने इस जटिल स्थिति में संतुलित रुख अपनाया है। नई दिल्ली क्षेत्रीय स्थिरता और संवाद पर जोर देती रही है। साथ ही भारत ने सभी पक्षों से तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील की है।
फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। सैन्य गतिविधियां जारी हैं और कूटनीतिक प्रयास भी समानांतर चल रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत की संवेदना और राजनयिक पहल क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति उसकी चिंता को भी दर्शाती है।