तमिलनाडु की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा मोड़ आया। पूर्व मुख्यमंत्री ओट्टाकरथेवर पन्नीरसेल्वम ने शुक्रवार को सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का दामन थाम लिया। इस कदम ने राज्य की चुनावी रणनीतियों को नई दिशा दी।
मुख्यमंत्री M K Stalin ने चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में उन्हें औपचारिक रूप से शामिल कराया। वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार पार्टी उन्हें थेनी जिले की बोदी मेट्टू सीट से उतार सकती है। यह उनका पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र माना जाता है।
जयललिता के करीबी से नई पारी तक
पन्नीरसेल्वम लंबे समय तक दिवंगत नेता जे. जयललिता के करीबी रहे। हालांकि 2016 में उनके निधन के बाद पार्टी में नेतृत्व संघर्ष तेज हुआ। पन्नीरसेल्वम और एडप्पादी के. पलानीस्वामी के बीच टकराव बढ़ा। इस संघर्ष ने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को दो खेमों में बांट दिया।
आखिरकार पार्टी नेतृत्व ने पन्नीरसेल्वम को हाशिये पर धकेला और बाद में निष्कासित कर दिया। इसके बाद उन्होंने अलग संगठन बनाकर खुद को जयललिता की विरासत का असली वारिस बताया। लेकिन उनका गुट व्यापक समर्थन जुटाने में सफल नहीं हुआ।
डीएमके की रणनीति, दक्षिण पर नजर
हाल के हफ्तों में पन्नीरसेल्वम ने डीएमके नेतृत्व से कई दौर की बातचीत की। मंत्री पी.के. सेकर बाबू ने इन चर्चाओं में अहम भूमिका निभाई। अंततः शुक्रवार को उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी जॉइन की।
डीएमके इस कदम को दक्षिण तमिलनाडु में पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखती है। खासकर थेवर बहुल क्षेत्रों में पन्नीरसेल्वम का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में यह फैसला विपक्षी दल के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।
ईपीएस पर सीधा हमला
पार्टी में शामिल होने के बाद पन्नीरसेल्वम ने मीडिया से बात की। उन्होंने एडप्पादी के. पलानीस्वामी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अहंकार और एकतरफा फैसलों ने एआईएडीएमके को कमजोर किया। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्टालिन के नेतृत्व में राज्य में बेहतर प्रशासन दिख रहा है।
कुछ समय पहले पन्नीरसेल्वम ने एआईएडीएमके में वापसी की इच्छा जताई थी। उन्होंने पलानीस्वामी को “बड़ा भाई” भी कहा था। लेकिन पलानीस्वामी ने सुलह से साफ इनकार कर दिया।
भाजपा की प्रतिक्रिया
इससे पहले पन्नीरसेल्वम का गुट भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग हो चुका था। उन्होंने BJP से नाराजगी भी जताई। सूत्रों के अनुसार उन्होंने महसूस किया कि भाजपा ने उनके लिए कोई ठोस पहल नहीं की।
भाजपा नेता Tamilisai Soundararajan ने इस फैसले को महत्वहीन बताया। उन्होंने कहा कि इससे एनडीए पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने इसे “अकृतज्ञ कदम” करार दिया।
चुनावी माहौल गर्म
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव मई से पहले होने हैं। ऐसे में दलों के बीच जोड़-तोड़ तेज हो गई है। पन्नीरसेल्वम का यह फैसला डीएमके को दक्षिण में मजबूती दे सकता है। वहीं एआईएडीएमके के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
अब सभी दल रणनीति पर फिर से काम कर रहे हैं। चुनावी मुकाबला और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।