“परियोजनाएं नहीं, सिर्फ नाम बदलना?”: शशि थरूर का केंद्र पर हमला

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नई दिल्ली में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केरल का नाम “केरलम” करने के निर्णय की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार विकास से ज्यादा प्रतीकों पर ध्यान दे रही है। उन्होंने साफ कहा कि जनता परियोजनाएं चाहती है, केवल नाम परिवर्तन नहीं।

थरूर ने सबसे पहले भाषाई पहलू उठाया। उन्होंने कहा कि मलयालम में राज्य का नाम पहले से “केरलम” ही है। अब वही शब्द अंग्रेजी में लाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि इससे जमीन पर क्या बदलेगा। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से अस्पताल, सड़क या उद्योग नहीं बनते।

इसके बाद उन्होंने विकास का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने केरल को एम्स नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने नए राष्ट्रीय संस्थान नहीं दिए। उन्होंने केंद्रीय बजट का जिक्र किया। उनके अनुसार बजट में राज्य के लिए बड़ी परियोजनाएं शामिल नहीं हैं। इसलिए उन्होंने तर्क दिया कि जब विकास की बात आती है तो सरकार चुप रहती है, लेकिन नाम बदलने पर तुरंत मंजूरी देती है।

इस बीच थरूर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी टिप्पणी की। उन्होंने एक “छोटा भाषाई सवाल” रखा। उन्होंने पूछा कि अगर राज्य का नाम “केरलम” होगा तो लोगों को क्या कहा जाएगा। अभी “केरलाइट” और “केरलन” शब्द प्रचलित हैं। उन्होंने हल्के व्यंग्य में कहा कि “केरलमाइट” किसी सूक्ष्म जीव जैसा लगता है। वहीं “केरलमियन” किसी खनिज जैसा सुनाई देता है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने फैसले की व्यावहारिकता पर प्रश्न खड़ा किया।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने औपचारिक कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह फैसला राज्य विधानसभा चुनाव से पहले आया। केरल में मई से पहले चुनाव होने हैं। राज्य 140 विधानसभा सदस्यों का चुनाव करेगा। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग ने अभी तारीख घोषित नहीं की है।

दरअसल, केरल विधानसभा पहले ही नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 2024 में यह प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में “केरलम” नाम अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि यह मांग ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी है। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मलयालम भाषी क्षेत्रों को एकजुट करने की आवाज उठी थी। उनके अनुसार “केरलम” नाम उस सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।

हालांकि, विपक्ष इस समय और प्राथमिकता पर सवाल उठा रहा है। थरूर ने संकेत दिया कि राज्य को स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे में निवेश की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोग रोजगार और संस्थानों की मांग करते हैं। उन्होंने दोहराया कि नाम बदलने से विकास अपने आप नहीं आता।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि चुनाव से पहले यह मुद्दा बहस को तेज करेगा। सत्तारूढ़ पक्ष इसे सांस्कृतिक सम्मान का कदम बताएगा। वहीं विपक्ष इसे प्राथमिकताओं का विचलन बताएगा। फिलहाल, नाम परिवर्तन पर राजनीतिक टकराव जारी है। जनता अब देखेगी कि आने वाले महीनों में विकास और पहचान की बहस किस दिशा में जाती है।


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