अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध टाल दिया। बुधवार को उन्होंने कांग्रेस के संयुक्त सत्र में यह बात कही। उन्होंने कहा कि उनके हस्तक्षेप ने बड़ी तबाही रोकी। उन्होंने चेतावनी दी कि हालात परमाणु टकराव की ओर बढ़ रहे थे। उन्होंने कहा, “भारत और पाकिस्तान परमाणु युद्ध में उतर जाते।” साथ ही उन्होंने जोड़ा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें बताया कि 35 मिलियन लोग मारे जाते, अगर अमेरिका ने दखल न दिया होता।
ट्रंप ने मई 2025 के सैन्य तनाव का जिक्र किया। यह तनाव 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बढ़ा। हमले में 26 नागरिकों की जान गई। इसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले किए। फिर दोनों देशों के बीच गोलाबारी और जवाबी कदम तेज हुए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चिंता जताई। कई देशों ने संयम की अपील की।
इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने अपनी भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने व्यापार समझौतों और टैरिफ को दबाव के औजार की तरह इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों को साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर तनाव नहीं रुका तो अमेरिका व्यापार वार्ता रोक देगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने को तैयार थे। उनके अनुसार इस सख्त रुख ने दोनों पक्षों को पीछे हटने पर मजबूर किया।
पिछले सप्ताह भी ट्रंप ने यही दावा दोहराया। अपने “बोर्ड ऑफ पीस” कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उन्होंने दोनों देशों के नेताओं से सीधे बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने फोन पर चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर आप नहीं रुकते तो मैं व्यापार समझौते नहीं करूंगा।” फिर उन्होंने जोड़ा कि इस दबाव के बाद समझौता बना।
हालांकि, नई दिल्ली इस दावे से सहमत नहीं दिखती। भारत ने स्पष्ट कहा कि 10 मई को जो युद्धविराम समझ बना, वह सीधे द्विपक्षीय बातचीत का नतीजा था। भारतीय अधिकारियों ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार किया। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान ने आपसी संवाद से समाधान निकाला।
इस बीच ट्रंप ने हाल के महीनों में 80 से अधिक बार यही दावा दोहराया। उन्होंने अलग-अलग मौकों पर लड़ाई के दौरान गिराए गए विमानों की संख्या भी बताई। मगर उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस देश के विमान गिरे। इससे उनके बयानों पर बहस बढ़ी।
भारत और पाकिस्तान दशकों से तनावपूर्ण संबंध साझा करते हैं। दोनों देशों के पास परमाणु हथियार हैं। इसलिए हर सैन्य टकराव वैश्विक चिंता बढ़ाता है। मई 2025 में हालात तेजी से बिगड़े। फिर कूटनीतिक प्रयास तेज हुए। अंततः दोनों पक्ष पीछे हटे।
अब ट्रंप इस घटनाक्रम को अपनी कूटनीतिक उपलब्धि बताते हैं। वहीं भारत इसे द्विपक्षीय प्रक्रिया का परिणाम मानता है। इस तरह संघर्ष की कहानी पर अलग-अलग दावे सामने आते हैं। तथ्यों से इतना स्पष्ट है कि पहलगाम हमले के बाद तनाव बढ़ा, सैन्य कार्रवाई हुई और फिर दोनों देशों ने टकराव से दूरी बनाई। लेकिन युद्धविराम की पहल किसने की, इस पर राजनीतिक मतभेद अब भी जारी हैं।