आयकर विभाग ने विदेशी ठिकानों पर छिपाए गए 14,601 करोड़ रुपये के निवेश को कर दायरे में शामिल किया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने पहली बार यह समेकित आंकड़ा सार्वजनिक किया। बोर्ड ने 30 जनवरी 2026 की आरटीआई जवाब में यह जानकारी दी।
यह आंकड़ा पनामा पेपर्स, पैराडाइज पेपर्स और पैंडोरा पेपर्स से जुड़े मामलों पर आधारित है। इन वैश्विक खुलासों ने टैक्स हेवन में रखी गई संपत्तियों और शेल कंपनियों का खुलासा किया था। इन मामलों की जांच में भारतीय एजेंसियों ने भी कार्रवाई शुरू की।
सीबीडीटी के अनुसार, पनामा पेपर्स से जुड़े मामलों में 13,800 करोड़ रुपये कर के दायरे में आए। पैराडाइज पेपर्स मामलों में 115 करोड़ रुपये शामिल हुए। वहीं पैंडोरा पेपर्स के बाद 686 करोड़ रुपये को कर योग्य माना गया। इन तीनों को मिलाकर कुल राशि 14,601 करोड़ रुपये बनती है।
पहले सीबीडीटी केवल “अघोषित आय का पता चला” जैसे आंकड़े साझा करता था। हालांकि इस बार बोर्ड ने “कर दायरे में लाई गई निवेश राशि” का विवरण दिया। इसका अर्थ यह है कि अधिकारियों ने प्रत्येक मामले का आकलन पूरा किया। उन्होंने संबंधित करदाताओं को नोटिस भेजे। फिर जवाब मिलने के बाद कर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी की।
इस कदम से जांच केवल पहचान तक सीमित नहीं रही। अब यह प्रक्रिया दंड और अभियोजन की दिशा में आगे बढ़ती है। हालांकि यह राशि अंतिम रूप से वसूले गए कर का आंकड़ा नहीं है। अंतिम वसूली कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय होती है।
इन वैश्विक जांचों की शुरुआत 2016 में पनामा पेपर्स से हुई। इसके बाद 2017 में पैराडाइज पेपर्स और 2021 में पैंडोरा पेपर्स सामने आए। अंतरराष्ट्रीय खोजी पत्रकारों ने लाखों दस्तावेजों की जांच की। इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने यह डेटा जुटाया और विभिन्न मीडिया संगठनों के साथ साझा किया।
पैंडोरा पेपर्स में 1.19 करोड़ गोपनीय दस्तावेजों की पड़ताल हुई। इन दस्तावेजों में 29,000 से अधिक ऑफशोर संस्थाओं की जानकारी थी। कई व्यक्तियों ने इन संस्थाओं का उपयोग टैक्स बचाने के लिए किया।
पहले की आरटीआई जानकारी के अनुसार, तीनों खुलासों के बाद 1,255 कर मामले दर्ज हुए। इनमें 426 मामले पनामा पेपर्स से जुड़े थे। 494 मामले पैराडाइज पेपर्स से संबंधित थे। जबकि 335 मामले पैंडोरा पेपर्स से जुड़े थे।
सरकार ने पैंडोरा खुलासे के तुरंत बाद मल्टी एजेंसी ग्रुप का गठन किया। यह समूह जांच की निगरानी करता है। अब तक यह समूह सात बैठकें कर चुका है। हालांकि सीबीडीटी ने बैठकों का विस्तृत ब्यौरा साझा नहीं किया। बोर्ड ने कहा कि ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने से जांच प्रभावित हो सकती है।
वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय खुफिया इकाई ने भी 482 नामित व्यक्तियों के संबंध में विदेशी अधिकार क्षेत्रों से जानकारी मांगी।
इन कार्रवाइयों से साफ है कि कर विभाग ने विदेशी अघोषित निवेश पर शिकंजा कसने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।