फरीदाबाद फैक्ट्री आग में मौत का आंकड़ा 4 पहुंचा, फायरकर्मी और दारोगा ने तोड़ा दम
फरीदाबाद के मुजेसर औद्योगिक क्षेत्र में लगी भीषण आग ने अब चार लोगों की जान ले ली। पहले दो घायलों की मौत हुई। इसके बाद एक फायरकर्मी और एक पुलिस अधिकारी ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। प्रशासन ने शनिवार को इसकी पुष्टि की।
सबसे पहले सोमवार शाम करीब चार बजे एक फैक्ट्री में हादसा हुआ। मजदूर स्टील प्लेट काटने वाली मशीन चला रहे थे। तभी मशीन से निकली चिंगारी पास रखे रसायनों के ड्रम पर गिरी। रसायन तुरंत भड़क उठे। फिर एक के बाद एक धमाके हुए। करीब 20 से 25 ड्रम पास-पास रखे थे। इसी वजह से आग तेजी से फैल गई।
आग ने देखते ही देखते कलकाजी लुब्रिकेंट्स की पूरी यूनिट को अपनी चपेट में ले लिया। लपटों ने फैक्ट्री के एक बड़े हिस्से को जला दिया। साथ ही आसपास खड़े कई वाहन भी आग की चपेट में आए। सौ मीटर के दायरे में खड़ी कारें और दोपहिया वाहन जलकर राख हो गए।
इस दौरान फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। फायरकर्मी भुवि चंद, उम्र 45 वर्ष, ने मोर्चा संभाला। वे एनआईटी फायर स्टेशन में तैनात थे। उन्होंने अपने साथी रणवीर के साथ आग बुझाने की कोशिश की। इसी दौरान वे गंभीर रूप से झुलस गए। डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया। पहले वे बातचीत कर रहे थे। फिर उनकी हालत बिगड़ी। डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा। आखिरकार शुक्रवार दोपहर उन्होंने दम तोड़ दिया।
उधर रणवीर अब भी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। डॉक्टर उनकी हालत नाजुक बताते हैं।
इसी बीच मुजेसर थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर रवि चंद भी आग की चपेट में आए। वे मूल रूप से यूपी के कैथल जिले के क्योड़क गांव के रहने वाले थे। डॉक्टरों ने उनका इलाज सफदरजंग अस्पताल में किया। लेकिन शनिवार सुबह करीब साढ़े सात बजे उन्होंने भी दम तोड़ दिया। पुलिस विभाग ने कहा कि रवि चंद के परिवार को ड्यूटी पर शहीद होने वाले अधिकारी के अनुसार मुआवजा मिलेगा।
इससे पहले गुरुवार को दो अन्य घायलों की मौत हुई। डॉक्टरों ने उनका इलाज एम्स दिल्ली में किया। अभिषेक मोंगा, उम्र 35 वर्ष, सेक्टर 23 के निवासी थे। वे कलकाजी लुब्रिकेंट ट्रेडिंग कंपनी के सह-मालिक थे। वहीं प्रदीप कुमार, उम्र 35 वर्ष, संजय कॉलोनी में रहते थे। पड़ोसियों ने कहा कि प्रदीप कंपनी में काम करते थे। हालांकि पुलिस परिवार से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार कर रही है।
फरीदाबाद पुलिस के अनुसार अभिषेक मोंगा और उनके पिता विजय मोंगा दुकान चलाते थे। पुलिस ने दोनों औद्योगिक इकाइयों के मालिकों और प्रबंधकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने खतरनाक तरीके से गंभीर चोट पहुंचाने की धाराओं में केस दर्ज किया।
अब जांच टीमें फैक्ट्री में सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारी रसायनों के भंडारण और अग्नि सुरक्षा नियमों की समीक्षा कर रहे हैं। यह हादसा औद्योगिक इलाकों में सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े करता है।
