फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा निजी संदेश सार्वजनिक करने पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नेताओं को सम्मान बनाए रखना चाहिए। साथ ही, उन्होंने हिंसा और अपमान की राजनीति को गलत बताया।
दरअसल, ट्रंप ने दोनों नेताओं के बीच हुए निजी टेक्स्ट संदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर साझा किए। इसके बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई। इसी बीच मैक्रों तीन दिन की भारत यात्रा पर पहुंचे। उन्होंने भारतीय पॉडकास्टर राज शमानी के साथ ‘फिगरिंग आउट’ कार्यक्रम में बातचीत की।
सबसे पहले मैक्रों ने भारत-फ्रांस संबंधों पर चर्चा की। फिर बातचीत वैश्विक राजनीति और अमेरिका के साथ उनके मतभेदों पर पहुंची। जब उनसे निजी संदेश लीक होने पर सवाल पूछा गया, तब उन्होंने सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि, उन्होंने कूटनीति में सम्मान की अहमियत पर जोर दिया।
मैक्रों ने कहा कि नेतृत्व में सम्मान जरूरी है। नेता विचारों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन उन्हें असहमति सम्मान के साथ रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र नागरिकों को नेतृत्व बदलने का अधिकार देता है। इसलिए किसी भी विवाद में हिंसा या अपमान की जरूरत नहीं होती।
उन्होंने आगे कहा कि समाज ने दशकों में सभ्यता की प्रक्रिया को मजबूत किया है। संस्थानों ने समय के साथ भरोसा बनाया है। इसलिए जब नेता पीछे की ओर जाते दिखते हैं, तो लोगों को आश्चर्य होता है। उनके मुताबिक, ऐसा रुख दुनिया को गलत संदेश देता है।
इसके अलावा मैक्रों ने नफरत भरे भाषण और हिंसा के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही सबसे मजबूत माध्यम होता है। यदि लोग बदलाव चाहते हैं, तो वे चुनाव के जरिए निर्णय लेते हैं। इस प्रक्रिया में गरिमा बनी रहनी चाहिए।
यह विवाद उस समय गहरा हुआ जब फ्रांस ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया। ट्रंप ने इस बोर्ड की स्थापना गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के लिए की थी। हालांकि, फ्रांस समेत कई देशों ने इस पहल पर सवाल उठाए। उन्होंने बोर्ड के चार्टर में गाजा और इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के व्यापक संदर्भ की कमी पर चिंता जताई।
इसके तुरंत बाद ट्रंप ने फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह व्यापारिक दबाव फ्रांस को बोर्ड में शामिल होने के लिए मजबूर कर सकता है। इस बयान से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा।
फिर ट्रंप ने निजी संदेश सार्वजनिक कर दिए। इन संदेशों में मैक्रों ने अमेरिका की ग्रीनलैंड में रुचि को लेकर चिंता जताई थी। इस कदम ने कूटनीतिक मर्यादा पर नई बहस छेड़ दी।
हालांकि, मैक्रों ने व्यक्तिगत टिप्पणी से परहेज किया। उन्होंने मुद्दे को व्यापक लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में रखा। उन्होंने संकेत दिया कि मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सम्मान अनिवार्य है।
भारत यात्रा के दौरान मैक्रों ने रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद ही आगे का रास्ता दिखाता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मैक्रों का संदेश साफ रहा—लोकतंत्र में असहमति हो सकती है, लेकिन हिंसा और अपमान की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं।