भारत आज अमेरिकी नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन में होगा शामिल, वैश्विक टेक साझेदारी को नई दिशा

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नई दिल्ली – भारत शुक्रवार को पैक्स सिलिका में शामिल होने जा रहा है। अमेरिका ने इस रणनीतिक गठबंधन की शुरुआत दिसंबर 2025 में की थी। यह समूह वैश्विक एआई और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित करना चाहता है। साथ ही, यह गैर-सहयोगी देशों पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य रखता है। इस कदम से भारत अग्रणी टेक अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपनी रणनीतिक नजदीकी बढ़ाएगा।

सबसे पहले, यह साझेदारी महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन में सहयोग बढ़ाएगी। फिर दोनों देश सेमीकंडक्टर निर्माण में तालमेल मजबूत करेंगे। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में संयुक्त पहल तेज होगी। सरकार मानती है कि इससे सुरक्षित और मजबूत वैश्विक सिलिकॉन इकोसिस्टम तैयार होगा।

दरअसल, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दिल्ली और वॉशिंगटन प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देश अन्य पहलों पर भी आगे बढ़ रहे हैं। वे आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देना चाहते हैं। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव दिखा था। अब दोनों देश संबंधों को स्थिर और व्यापक बनाना चाहते हैं।

अमेरिका के अलावा इस गठबंधन में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजराइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन शामिल हैं। ये देश वैश्विक तकनीकी और औद्योगिक नेटवर्क में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए यह मंच रणनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जा रहा है।

अमेरिकी आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने इस पहल की पृष्ठभूमि स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि 20वीं सदी में तेल और इस्पात ने दुनिया को चलाया। अब 21वीं सदी में कंप्यूटर वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी बन चुके हैं। इसलिए लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन खनिजों से चिप, बैटरी और उन्नत उपकरण तैयार होते हैं।

पैक्स सिलिका विश्वसनीय देशों के बीच साझा योजना तैयार करना चाहता है। इसका उद्देश्य भविष्य की एआई और टेक प्रणालियों का संयुक्त निर्माण है। यह पहल तकनीकी सप्लाई चेन के हर चरण को कवर करती है। पहले ऊर्जा आपूर्ति पर ध्यान दिया जाएगा। फिर महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके बाद हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और एआई मॉडल विकास पर सहयोग बढ़ेगा।

सदस्य देश समृद्धि और तकनीकी प्रगति के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं। वे आर्थिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता देंगे। इस तरह वे वैश्विक सप्लाई चेन में संतुलन और स्थिरता लाना चाहते हैं।

दीर्घकालिक लक्ष्य साफ है। यह गठबंधन तकनीकी क्षेत्र के अग्रणी देशों को एक मंच पर लाना चाहता है। यदि ये देश मिलकर काम करते हैं, तो वे एआई की पूरी आर्थिक क्षमता खोल सकते हैं। साथ ही, वे नई एआई आधारित अर्थव्यवस्था से लाभ उठा सकते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। पैक्स सिलिका घोषणा में सदस्य देशों ने माना कि एआई क्रांति तेजी से आगे बढ़ रही है। यह बदलाव वैश्विक सप्लाई चेन को पुनर्गठित कर रहा है। साथ ही, यह नई औद्योगिक मांग पैदा कर रहा है।

एआई सिस्टम को भारी ऊर्जा की जरूरत होती है। इसलिए बिजली उत्पादन और डेटा सेंटर का विस्तार जरूरी हो गया है। इसके अलावा, चिप और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में भी तेज वृद्धि दिख रही है। नई अवसंरचना और नए बाजार उभर रहे हैं।

इस गठबंधन का एक प्रमुख उद्देश्य दबाव आधारित निर्भरता घटाना है। देश किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहते। वे वैश्विक व्यापार में दबाव या हस्तक्षेप से बचना चाहते हैं।

दूसरा उद्देश्य भरोसेमंद डिजिटल ढांचा बनाना है। सदस्य देश उन्नत तकनीक को चोरी और दुरुपयोग से सुरक्षित रखना चाहते हैं। भारत की भागीदारी से यह गठबंधन एशिया में और मजबूत होगा। साथ ही, वैश्विक टेक कूटनीति में भारत की भूमिका और स्पष्ट होगी।


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