VVIP मूवमेंट के चलते दिल्ली में दो चरणों में ट्रैफिक पाबंदी, एआई समिट के अंतिम दिन बड़े फैसलों पर नजर

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दिल्ली में शुक्रवार को वीवीआईपी मूवमेंट के कारण पुलिस ने दो चरणों में ट्रैफिक पाबंदी लागू की। सबसे पहले अधिकारियों ने लुटियंस दिल्ली और आसपास के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित की। फिर पुलिस ने कई रास्तों पर डायवर्जन लगाए। साथ ही, उसने यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रमुख स्थलों के बाहर निगरानी बढ़ाई। नतीजतन, कई इलाकों में ट्रैफिक की रफ्तार धीमी रही।

दरअसल, भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2025 का पांचवां और अंतिम दिन आज आयोजित हुआ। इसलिए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। इस दिन कई अहम सत्र तय हुए। सबसे पहले विशेषज्ञों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को एआई के जरिए नए सिरे से गढ़ने पर चर्चा की। इसके बाद वक्ताओं ने एआई युग में अमेरिका-भारत साझेदारी की भूमिका पर विचार रखा। साथ ही, प्रतिनिधियों ने कूटनीति और वार्ता में एआई के उपयोग पर मंथन किया।

इसके अलावा, डेटा संप्रभुता और भारतीय समाज के लिए सामूहिक एआई जैसे मुद्दों पर भी बहस हुई। नीति निर्माताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने जिम्मेदार नवाचार और पारदर्शी ढांचे की जरूरत दोहराई।

शुक्रवार को ब्राजील भी चर्चा के केंद्र में रहा। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने समिट को संबोधित किया। उनके साथ ब्राजील के कई मंत्रियों ने भी भाग लिया। उन्होंने एआई के भविष्य पर अपना दृष्टिकोण रखा। साथ ही, उन्होंने विकासशील देशों की भूमिका को रेखांकित किया। इस भागीदारी से समिट को वैश्विक आयाम मिला।

इसी क्रम में नेताओं ने ‘लीडर्स डिक्लेरेशन’ को अपनाने पर भी विचार किया। यह प्रस्तावित घोषणा वैश्विक एआई शासन के लिए साझा रोडमैप तय कर सकती है। प्रतिनिधियों ने सामूहिक प्रतिबद्धताओं पर चर्चा की। यदि सहमति बनी, तो यह दस्तावेज सहयोग और जवाबदेही की दिशा तय करेगा।

उधर, ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी GPAI की उच्चस्तरीय परिषद बैठकें भी हुईं। सदस्यों ने नीति ढांचे की समीक्षा की। उन्होंने सरकारों, उद्योग और शोध संस्थानों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया।

एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट को संबोधित किया। उन्होंने भारत को वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र का अहम खिलाड़ी बताया। सबसे पहले उन्होंने उभरती तकनीकों के लिए मजबूत नियामक ढांचे की मांग की। फिर उन्होंने एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बाल सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। साथ ही, उन्होंने एआई के लोकतंत्रीकरण की वकालत की।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की। उन्होंने सीईओ राउंडटेबल की भी अगुवाई की। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने जिम्मेदार एआई विस्तार और वैश्विक सहयोग पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने इन बैठकों को दूरदर्शी और उपयोगी बताया।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने ‘MANAV’ विजन पेश किया। उन्होंने बताया कि एम नैतिक और एथिकल सिस्टम का प्रतीक है। ए जवाबदेह शासन और पारदर्शी नियमों को दर्शाता है। एन राष्ट्रीय संप्रभुता और डेटा अधिकारों पर जोर देता है। दूसरा ए सुलभ और समावेशी एआई की बात करता है। वी वैध और वैधानिक ढांचे का संकेत देता है। उन्होंने इस विजन को मानव कल्याण से जोड़ा।

वहीं, ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी समिट में मुख्य भाषण दिया। उन्होंने कहा कि सच्ची सुपरइंटेलिजेंस कुछ वर्षों में सामने आ सकती है। हालांकि, उन्होंने वैश्विक निगरानी तंत्र की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, दुनिया को उन्नत एआई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस व्यवस्था बनानी होगी।

इस तरह, कड़ी सुरक्षा और ट्रैफिक पाबंदियों के बीच दिल्ली ने एआई के भविष्य पर वैश्विक चर्चा की मेजबानी की।


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