द्वारका SUV हादसा: किशोर को जीवन का मूल्य समझ नहीं आया, जुवेनाइल बोर्ड की सख्त टिप्पणी

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दिल्ली के द्वारका में हुए घातक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। इस मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 17 वर्षीय आरोपी के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। बोर्ड ने साफ कहा कि किशोर को “जीवन की अनमोलता” समझ नहीं आई।

यह हादसा 3 फरवरी को सुबह करीब 11:50 बजे सेक्टर-11 में लाल बहादुर शास्त्री प्रबंधन संस्थान के पास हुआ। एक SUV ने मोटरसाइकिल और एक टैक्सी को टक्कर मारी। इस टक्कर में 23 वर्षीय साहिल धनैशरा की मौत हो गई। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे।

अगले दिन, 4 फरवरी को किशोर बोर्ड के सामने पेश हुआ। बोर्ड ने उससे सीधे सवाल किए। सदस्यों ने उसके हावभाव और जवाबों का मूल्यांकन किया। बोर्ड को उसमें पछतावा नजर नहीं आया। बोर्ड ने अपने 14 फरवरी के आदेश में दर्ज किया कि किशोर अपने कृत्य को लेकर remorse नहीं दिखाता। साथ ही, वह मानव जीवन के मूल्य को समझ नहीं पाता।

इसके बाद, बोर्ड ने उसे ऑब्जर्वेशन होम भेजने का फैसला किया। अधिकारियों ने यह कदम सुधार और परामर्श के उद्देश्य से उठाया। बोर्ड ने सुरक्षा और काउंसलिंग दोनों पर जोर दिया। उसने कहा कि किशोर न्याय कानून सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाता है, इसलिए परामर्श जरूरी है।

इसी बीच, हादसे का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। यह वीडियो घटना के तुरंत बाद का दृश्य दिखाता है। वीडियो में भीड़ आरोपी और उसकी बहन से बहस करती दिखती है। लोग उन्हें वहां से जाने से रोकते नजर आते हैं। क्लिप में बहन कहती सुनाई देती है कि बाइक सवार तेज गति से चला रहा था।

वीडियो में साहिल सड़क किनारे पड़े दिखते हैं। उनकी Yamaha R15 मोटरसाइकिल भी सड़क पर गिरी नजर आती है। पास में एक क्षतिग्रस्त स्विफ्ट डिजायर टैक्सी खड़ी दिखती है, जिसे SUV ने टक्कर मारी। पुलिस अब इस वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है। जांच अधिकारी तकनीकी विश्लेषण की तैयारी कर रहे हैं।

दूसरी ओर, आरोपी के पिता ने सार्वजनिक रूप से दुख जताया। उन्होंने साहिल की मां से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि वह अदालत के हर फैसले का पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह उस मां का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते, क्योंकि वह उसकी क्षति को लौटा नहीं सकते।

दिल्ली पुलिस ने पिता के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने उन्हें जिम्मेदारी के दायरे में लिया। पिता ने बताया कि वह 3 फरवरी को काम के सिलसिले में गोरखपुर में थे। उन्हें फोन पर हादसे की सूचना मिली। इसके बाद वह तुरंत दिल्ली लौटे और पुलिस से पूरी जानकारी ली।

इस बीच, बोर्ड ने 10 फरवरी को किशोर को अंतरिम जमानत दी। वह कक्षा 10 का छात्र है और बोर्ड परीक्षाएं दे रहा है। बोर्ड ने पढ़ाई की निरंतरता को ध्यान में रखा। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि जमानत अस्थायी है। किशोर को 9 मार्च के बाद सरेंडर करना होगा।

जमानत के दौरान वह अपने पिता की अभिरक्षा में रहेगा। उसे 10,000 रुपये का निजी मुचलका और समान राशि की जमानत देनी होगी। यह मुचलका 9 मार्च तक मान्य रहेगा।

जमानत याचिका में बचाव पक्ष ने उसे मेधावी छात्र बताया। याचिका ने हादसे को दुर्घटना करार दिया। साथ ही, उसने कहा कि किशोर मौके पर रुका, पुलिस को सूचना दी और जांच में सहयोग किया।

अब जांच आगे बढ़ रही है। बोर्ड सुधार और जवाबदेही दोनों पर जोर दे रहा है। वहीं, साहिल का परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।


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