कोलंबो में रविवार रात भारत और पाकिस्तान की टक्कर से बड़ा मुकाबला शायद ही कोई हो। स्टेडियम भरा हुआ था। एक तरफ नीला रंग। दूसरी तरफ हरा रंग। हर गेंद पर शोर। हर चौके पर उछाल। लेकिन मैदान पर कहानी एकतरफा रही। शुरुआत में ही संकेत मिल गए।
आठवें ओवर में शादाब खान परेशान दिखे। उन्होंने फील्ड बदली। गति बदली। गुगली डाली। स्लाइडर फेंकी। फिर भी कोई फायदा नहीं हुआ। सामने ईशान किशन डटे रहे। उन्होंने रिवर्स स्वीप से चौका जड़ा। उसी पल मैच की दिशा तय हो गई।
इसके बाद शादाब ने कप्तान की ओर देखा। जवाब किसी के पास नहीं था। तभी समझ आ गया कि पाकिस्तान मुश्किल में है।
मैच से पहले माहौल अलग था। पाकिस्तान ने श्रीलंका में कई हफ्ते अभ्यास किया था। टीम ने धीमी पिचों पर तैयारी की। चार स्पिनरों पर भरोसा रखा। वहीं भारत तेज पिचों से आया था। आलोचक सवाल कर रहे थे। क्या भारतीय बल्लेबाज स्पिन झेल पाएंगे?
लेकिन भारत ने जवाब जल्दी दिया। टॉस पाकिस्तान ने जीता। उसने पहले गेंदबाजी चुनी। भारत ने बिना घबराए बल्लेबाजी शुरू की। शुरुआती ओवर संभलकर खेले। फिर किशन ने रफ्तार बढ़ाई।
मध्य ओवरों में उन्होंने 14 गेंदें लगातार खेलीं। इन गेंदों पर उन्होंने 41 रन जोड़े। चार गेंदबाज बदले गए। कोई कामयाब नहीं हुआ। नतीजतन, नौवें ओवर तक मैच भारत के पक्ष में झुक गया।
किशन ने 40 गेंदों पर 77 रन बनाए। उन्होंने 10 चौके और तीन छक्के लगाए। दूसरे छोर पर तिलक वर्मा शांत रहे। बाकी बल्लेबाजों ने स्ट्राइक घुमाई। जोखिम नहीं लिया। टीम ने लक्ष्य बनाया।
इस तरह भारत 175 रन तक पहुंचा। इस पिच पर यह स्कोर काफी था। दरअसल, यह निर्णायक साबित हुआ।
इसके बाद पाकिस्तान को तेज शुरुआत चाहिए थी। सबकी नजर ओपनरों पर थी। लेकिन भारत ने दबाव बना दिया।
पहले ओवर में हार्दिक पांड्या ने सटीक लाइन रखी। तीन डॉट गेंदें डालीं। फिर बल्लेबाज को फंसाया। कैच मिला। रिंकू सिंह ने उसे लपका। फिर जसप्रीत बुमराह आए। उन्होंने यॉर्कर फेंकी। विकेट गिरा। दो गेंद बाद दूसरा झटका लगा। स्कोर 13 पर तीन विकेट हो गया।
यहीं मैच खत्म हो गया। हालांकि बाबर आजम ने संभलने की कोशिश की। वह कुछ देर टिके। फिर अक्षर पटेल की गेंद पर चूक गए। इसके बाद पतन जारी रहा।
भारतीय स्पिनरों ने दबाव बनाए रखा। फील्डिंग चुस्त रही। हर गेंद पर आक्रमण दिखा। पाकिस्तान 18 ओवर में सिमट गया। भारत ने 61 रन से जीत दर्ज की।
मैच के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टीम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि 175 रन लक्ष्य से ऊपर थे। उन्होंने गेंदबाजों के अनुशासन को सराहा।
दरअसल, यह मैच सिर्फ एक जीत नहीं था। यह ट्रेंड का संकेत था। बीते कुछ सालों में भारत लगातार आगे रहा है। टीम हालात के अनुसार ढल जाती है। दबाव में बेहतर खेलती है।
वहीं पाकिस्तान अब भी स्थिरता खोज रहा है। तैयारी के बावजूद टीम लड़खड़ाती रही। रणनीति मैदान पर असर नहीं दिखा पाई। रविवार की रात एक पल सब पर भारी पड़ा। 14 गेंदें। चार गेंदबाज। एक बल्लेबाज। और पूरा मैच उसी में सिमट गया।
आठवें ओवर में शादाब का चेहरा सब कुछ कह गया। स्टेडियम का हरा हिस्सा जल्दी शांत हो गया। नीला हिस्सा आखिर तक गूंजता रहा।