अमेरिका में एक भारतीय नागरिक ने हत्या की सुपारी देने की साजिश में दोष स्वीकार कर लिया है। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। साथ ही, यह भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर डाल रहा है।
गुरुवार को US DOJ ने इस मामले की पुष्टि की। विभाग ने बताया कि 54 वर्षीय निखिल गुप्ता ने तीन गंभीर आरोपों को स्वीकार किया। इनमें मर्डर-फॉर-हायर, साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल हैं।
इसके बाद, गुप्ता ने मैनहैटन की एक संघीय अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। अदालत ने उसकी सजा की तारीख 29 मई 2026 तय की है। उसे अधिकतम 40 साल की जेल हो सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला न्यायाधीश सुनाएंगे।
इसी बीच, अभियोजकों ने मामले की पृष्ठभूमि सामने रखी। उनके अनुसार, गुप्ता ने एक भारतीय सरकारी कर्मचारी के निर्देश पर काम किया। उसने न्यूयॉर्क में रहने वाले एक भारतीय मूल के वकील और कार्यकर्ता की हत्या की योजना बनाई।
हालांकि, अदालत के दस्तावेज उसे “पीड़ित” कहते हैं। लेकिन जांच एजेंसियां उसे गुरपतवंत सिंह पन्नू मानती हैं। पन्नून खालिस्तान आंदोलन से जुड़ा प्रमुख चेहरा है।
भारत ने पन्नून को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया है। सरकार ने उसके संगठन पर प्रतिबंध लगाया है। साथ ही, उस पर अलग सिख राष्ट्र की मांग के जरिए हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।
इस बीच, अमेरिकी जांच एजेंसियों ने साजिश की परतें खोलीं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2023 में गुप्ता की मुलाकात विकाश यादव से हुई। अदालत ने यादव को कैबिनेट सचिवालय से जुड़ा कर्मचारी बताया।
यादव के निर्देश पर गुप्ता ने शूटर खोजने की कोशिश की। उसने अमेरिका में हत्या कराने की योजना बनाई। लेकिन उसे यह पता नहीं चला कि जिन लोगों से वह बात कर रहा था, वे पुलिस के लिए काम कर रहे थे।
इसके बाद, एजेंसियों ने हर बातचीत रिकॉर्ड की। गुप्ता ने हत्या के लिए 1 लाख डॉलर तय किए। उसने 15 हजार डॉलर एडवांस देने की बात भी की। साथ ही, उसने लक्ष्य का पता, फोन नंबर और दिनचर्या साझा की।
इसी दौरान, उसने समय पर भी ध्यान दिया। उसने जून 2023 में प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के कारण हत्या टालने को कहा। बाद में, कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद, उसने इंतजार खत्म करने की बात कही।
फिर, कानून एजेंसियों ने कार्रवाई तेज की। FBI और DEA ने मिलकर साजिश नाकाम की। उन्होंने किसी भी हमले से पहले योजना को रोक दिया।
जून 2023 में पुलिस ने गुप्ता को चेक गणराज्य में पकड़ा। बाद में, 2024 में उसे अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया।
इस मामले ने कूटनीतिक हलचल भी बढ़ाई। नवंबर 2023 में भारत ने एक उच्चस्तरीय समिति बनाई। सरकार ने आरोपों की जांच शुरू की। साथ ही, उसने सरकारी भूमिका से इनकार किया।
अब, गुप्ता का दोष स्वीकार करना जांच को नई दिशा देता है। इससे अमेरिकी दावों को मजबूती मिली है। वहीं, दोनों देशों पर पारदर्शिता का दबाव बढ़ा है।
फिलहाल, भारत सरकार ने आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञ जल्द बयान की उम्मीद कर रहे हैं। तब तक यह मामला सुरक्षा, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर बहस को आगे बढ़ाता रहेगा।