फरवरी को हार्ट हेल्थ मंथ के रूप में मनाया जाता है। इसलिए डॉक्टर इस महीने लोगों को दिल की सेहत पर खास ध्यान देने की सलाह देते हैं। खासतौर पर ब्लड प्रेशर पर नजर रखना जरूरी माना जाता है। कई लोग इसे नजरअंदाज करते हैं। कई लोग जांच टालते रहते हैं। नतीजतन, समस्या बिना लक्षण के बढ़ती जाती है।
इसी बीच, मशहूर हार्ट सर्जन Jeremy London ने लोगों को जागरूक किया है। उन्होंने नियमित ब्लड प्रेशर जांच को सबसे आसान और प्रभावी उपाय बताया। उन्होंने इसे दिल की बीमारी का सबसे आसान नियंत्रित होने वाला जोखिम कारक कहा।
सबसे पहले, उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। उसमें उन्होंने लोगों से सीधा सवाल किया। उन्होंने पूछा कि आखिरी बार आपने अपना ब्लड प्रेशर कब जांचा था। उन्होंने बताया कि हर दो में से एक अमेरिकी हाई बीपी से जूझ रहा है। फिर भी, कई लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती। इसी वजह से डॉक्टर इसे “साइलेंट किलर” कहते हैं।
क्यों जरूरी है ब्लड प्रेशर कंट्रोल करना
सबसे पहले, ब्लड प्रेशर दिल की कार्यक्षमता दिखाता है। जब दबाव बढ़ता है, तब धमनियों पर असर पड़ता है। धीरे-धीरे दिल, दिमाग और किडनी कमजोर होने लगते हैं। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
हालांकि, अच्छी बात यह है कि ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉ. लंदन कहते हैं कि यह सबसे आसान बदला जा सकने वाला जोखिम है। लोग अपनी दिनचर्या बदलकर इसे काबू में रख सकते हैं।
वे स्वस्थ वजन बनाए रखने की सलाह देते हैं। वे रोजाना व्यायाम पर जोर देते हैं। वे शराब सीमित करने को भी जरूरी मानते हैं। ये आदतें दिल को मजबूत बनाती हैं।
इसके अलावा, जब लाइफस्टाइल से फायदा नहीं मिलता, तब दवाएं मदद करती हैं। डॉक्टर मरीज की जरूरत के अनुसार दवा देते हैं। मरीज को दवा नियमित लेनी चाहिए। लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है।
कितनी बार जांच जरूरी है
इसके बाद, डॉ. लंदन साल में एक बार जांच कराने की आदत पर सवाल उठाते हैं। उनके मुताबिक, सालाना जांच काफी नहीं होती। इससे सही तस्वीर सामने नहीं आती।
इसलिए, वे दिन में दो बार जांच की सलाह देते हैं। एक बार सुबह। दूसरी बार शाम को। इससे औसत रीडिंग मिलती है।
ब्लड प्रेशर पूरे दिन बदलता रहता है। तनाव इसे बढ़ाता है। व्यायाम इसे प्रभावित करता है। नींद और खानपान भी भूमिका निभाते हैं। इसलिए, एक रीडिंग से सही स्थिति पता नहीं चलती।
नियमित रिकॉर्ड से पैटर्न सामने आता है। इससे समय रहते इलाज और बदलाव संभव हो पाता है।
घर पर जांच ज्यादा भरोसेमंद
इसके अलावा, डॉ. लंदन घर पर जांच को बेहतर मानते हैं। अस्पताल में कई लोग घबरा जाते हैं। घबराहट से रीडिंग बढ़ जाती है। घर पर व्यक्ति शांत रहता है। वह आराम से बैठता है। इसलिए नतीजे ज्यादा सही आते हैं।
वे डिजिटल मशीन खरीदने की सलाह देते हैं। भारत में ये मशीनें आसानी से मिल जाती हैं। लोग इन्हें Amazon जैसे प्लेटफॉर्म से भी खरीद सकते हैं। इनकी कीमत आमतौर पर ₹1,500 से ₹2,000 के बीच होती है।
जीवनशैली सबसे अहम
हालांकि, मशीन ही सब कुछ नहीं है। व्यक्ति को रिपोर्ट देखकर कदम उठाने चाहिए। उसे नमक कम करना चाहिए। उसे रोज चलना चाहिए। उसे पूरी नींद लेनी चाहिए। उसे धूम्रपान से दूर रहना चाहिए। जब लोग ये आदतें अपनाते हैं, तब ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे सुधरता है। शरीर में ऊर्जा बढ़ती है। बीमारी का खतरा घटता है।
साफ संदेश
अंत में, डॉ. लंदन का संदेश साफ है। लक्षण आने का इंतजार न करें। सालाना जांच पर निर्भर न रहें। रोज जिम्मेदारी लें। सुबह-शाम ब्लड प्रेशर मापें। औसत निकालें। डॉक्टर से सलाह लें। नियमों का पालन करें। छोटे कदम आज उठाएं। इससे आने वाले वर्षों की सेहत सुरक्षित रहेगी।