भारतीय आईटी शेयरों में मंगलवार को तेज बिकवाली दिखी। बाजार अचानक दबाव में आया। निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की। नतीजतन, पूरे सेक्टर में कमजोरी फैल गई।
शुरुआती कारोबार में Tata Consultancy Services और Infosys के शेयर करीब 6% टूट गए। इसके बाद आईटी इंडेक्स भी लगभग 5% गिर गया। साथ ही, व्यापक बाजार पर भी असर पड़ा।
खास बात यह रही कि किसी एक कंपनी की खबर ने गिरावट नहीं लाई। बल्कि, कई वैश्विक और घरेलू कारण एक साथ सामने आए। निवेशकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी चिंता बढ़ी। इसी वजह से सेक्टर पर दबाव गहरा गया।
पहला कारण: मजबूत अमेरिकी आंकड़े और ब्याज दर की चिंता
सबसे पहले, अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़ों ने बाजार को चौंकाया। हालिया रोजगार डेटा उम्मीद से बेहतर रहा। बेरोजगारी दर में भी हल्की गिरावट दर्ज हुई।
इसके कारण, निवेशकों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद घटा दी। विशेषज्ञ विनोद नायर के अनुसार, यही गिरावट का मुख्य ट्रिगर बना।
जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तब टेक शेयरों पर दबाव बढ़ता है। भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका से बड़ी कमाई करती हैं। ऐसे में वहां खर्च घटने का डर निवेशकों को परेशान करता है। इसलिए, उन्होंने जोखिम कम करना शुरू किया।
दूसरा कारण: अमेरिकी टेक शेयरों में गिरावट और एआई रीसेट
इसके बाद, अमेरिकी टेक बाजार में भी कमजोरी दिखी। वहां प्रमुख टेक शेयरों में तेज गिरावट आई। इससे एशियाई बाजारों में भी नकारात्मक संकेत मिले।
विशेषज्ञ वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, यह कोई बड़ी गिरावट नहीं है। लेकिन अगर यह रुझान जारी रहा, तो बाजार और फिसल सकता है।
पिछले साल वैश्विक तेजी का आधार एआई शेयर बने थे। हालांकि, भारत को इसका पूरा फायदा नहीं मिला। अब जब एआई ट्रेड में ठहराव आया है, तो उसका असर घरेलू शेयरों पर दिख रहा है।
इसके अलावा, आईटी सेक्टर भारत की कॉरपोरेट कमाई का बड़ा हिस्सा है। जब यह सेक्टर गिरता है, तो पूरा बाजार दबाव में आ जाता है।
तीसरा कारण: एआई से कारोबार मॉडल पर खतरा
सबसे बड़ी चिंता एआई से जुड़ी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काम की रफ्तार बढ़ा रहा है। ऑटोमेशन से कई काम आसान हो गए हैं। इससे प्रोजेक्ट जल्दी पूरे हो रहे हैं।
पहले आईटी कंपनियां कर्मचारियों की संख्या के आधार पर बिलिंग करती थीं। अब यह मॉडल कमजोर पड़ता दिख रहा है। कम लोगों में ज्यादा काम होने लगा है। इससे मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा, ईआरपी और सपोर्ट सेवाएं भी अब सुरक्षित नहीं रहीं। ग्राहक अब नतीजों के आधार पर भुगतान करना चाहते हैं। वे घंटे या स्टाफ की संख्या नहीं देखते।
आने वाले समय में इससे नई डील पर असर पड़ सकता है। इसलिए, विश्लेषक डील फ्लो पर खास नजर रख रहे हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञ घबराकर बेचने की सलाह नहीं देते। बाजार अभी अस्थिर दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में धैर्य जरूरी है।
निवेशकों को अमेरिकी बाजार, ब्याज दर और कंपनियों के संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियां लंबे समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
कुछ सेक्टरों में गिरावट खरीदारी का मौका भी दे सकती है। हालांकि, फैसला सोच-समझकर लेना जरूरी है।
आगे का रास्ता
कुल मिलाकर, यह गिरावट सिर्फ एक दिन की नहीं है। इसके पीछे मजबूत अमेरिकी आंकड़े, दर कटौती में देरी, वैश्विक टेक दबाव और एआई से जुड़ी चिंता है।
जब तक वैश्विक बाजार स्थिर नहीं होते और कंपनियां साफ दिशा नहीं देतीं, तब तक आईटी शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क और संयमित रहना होगा।