बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनाव के तहत मतदान जारी है। इसी बीच राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। बीएनपी नेता तारीक रहमान ने ढाका के गुलशन मॉडल स्कूल केंद्र पर अपना वोट डाला। वहीं, गोपालगंज में हुए देसी बम धमाके में तीन लोग घायल हो गए। यह इलाका पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का गढ़ माना जाता है।
घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी की। प्रशासन ने अतिरिक्त बल तैनात किया। इसके बाद मतदान प्रक्रिया को जारी रखा गया।
इस चुनाव में देशभर से 2,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं। हालांकि, इनमें केवल 109 महिलाएं हैं। स्थानीय मीडिया ने इस आंकड़े पर चिंता जताई है।
यह चुनाव कई मायनों में अहम माना जा रहा है। यह 2009 के बाद पहला बड़ा राजनीतिक मुकाबला है। चुनाव आयोग ने शेख हसीना की अवामी लीग का पंजीकरण रद्द कर दिया था। इसलिए पार्टी इस चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकी।
इसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरी। पार्टी ने तारीक रहमान को मुख्य चेहरा बनाया। तारीक पूर्व प्रधानमंत्री जिया के बेटे हैं। वह दिसंबर में 17 साल बाद देश लौटे थे। उन्होंने लोकतंत्र मजबूत करने और अर्थव्यवस्था सुधारने का वादा किया है।
वहीं, बीएनपी को 11 दलों के गठबंधन से चुनौती मिल रही है। इस गठबंधन का नेतृत्व जमात-ए-इस्लामी कर रही है। शेख हसीना के कार्यकाल में सरकार ने जमात पर प्रतिबंध लगाया था। बाद में पार्टी ने दोबारा राजनीतिक जमीन बनाई।
इस गठबंधन में नेशनल सिटीजन पार्टी भी शामिल है। युवा नेताओं ने 2024 के आंदोलन के बाद इस पार्टी की शुरुआत की थी। ये नेता 30 साल से कम उम्र के हैं। वे व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं।
युवाओं की भूमिका इस चुनाव में निर्णायक मानी जा रही है। लगभग 25 प्रतिशत मतदाता जनरेशन जेड से आते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ पारवेज करीम अब्बासी का कहना है कि युवाओं का वोट नतीजे तय करेगा।
उधर, शेख हसीना ने भारत में निर्वासन से चुनाव की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बिना समावेशी प्रक्रिया के स्थिरता संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि बहिष्कार से असंतोष बढ़ेगा और संस्थाएं कमजोर होंगी।
मतदान के दौरान कई मुद्दे चर्चा में रहे। सबसे पहले भ्रष्टाचार मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंता बना। सर्वे में लोगों ने सरकारी तंत्र पर भरोसे की कमी जताई।
दूसरा बड़ा मुद्दा महंगाई रहा। जनवरी में महंगाई दर 8.58 प्रतिशत तक पहुंची। इससे आम लोगों पर बोझ बढ़ा।
इसके अलावा आर्थिक विकास भी अहम विषय रहा। कोरोना महामारी के बाद उद्योगों को नुकसान हुआ। खासकर कपड़ा निर्यात प्रभावित हुआ। इससे रोजगार के अवसर घटे।
रोजगार की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। देश की 40 प्रतिशत आबादी 30 साल से कम उम्र की है। युवा वर्ग सरकार से नौकरियों की मांग कर रहा है।
अवामी लीग पर प्रतिबंध भी बहस का विषय बना। हसीना ने कहा कि उनके समर्थकों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला। कुछ मतदाताओं ने मतदान से दूरी बनाने की बात कही। हालांकि, विशेषज्ञ बड़े बहिष्कार की संभावना नहीं मानते।
इस चुनाव के साथ राजनीतिक सुधारों पर जनमत संग्रह भी होगा। इसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा और सत्ता पर नियंत्रण जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
यह चुनाव बांग्लादेश के लोकतंत्र की बड़ी परीक्षा है। नतीजे बताएंगे कि देश संस्थागत सुधार की ओर बढ़ता है या नहीं। करीब 50 लाख नए मतदाता पहली बार वोट डाल रहे हैं। इसलिए यह चुनाव आने वाली पीढ़ी की दिशा भी तय करेगा।