मंगलवार को संसद का माहौल फिर गरमा गया। विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। कुल 118 सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।
सबसे पहले, विपक्षी नेताओं ने सुबह बैठक की। उन्होंने हालात पर चर्चा की। फिर उन्होंने नोटिस देने का फैसला किया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष के कक्ष पहुंचा। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने मांगें रखीं। हालांकि, बैठक से कोई समाधान नहीं निकला।
इसी बीच, दोपहर 1.14 बजे विपक्ष ने औपचारिक रूप से नोटिस सौंप दिया। कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी। इसलिए विपक्ष ने संवैधानिक रास्ता अपनाया।
इसके बाद सूत्रों ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ओम बिरला फिलहाल सदन की कार्यवाही नहीं चलाएंगे। वे नोटिस पर फैसले तक कुर्सी नहीं संभालेंगे। साथ ही, उनके करीबी सूत्रों ने कहा कि वह नैतिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
इस विवाद की पृष्ठभूमि पहले से तैयार थी। हाल ही में अध्यक्ष ने प्रदर्शन कर रहे आठ सांसदों को निलंबित किया था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कुछ सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंचकर अभूतपूर्व घटना कर सकते थे। कांग्रेस ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया।
इसी कारण विपक्ष लगातार नाराज रहा। वे अध्यक्ष के रवैये पर सवाल उठाते रहे। उनका कहना था कि उन्हें बोलने का मौका नहीं मिलता। कई बार नेता प्रतिपक्ष का भाषण बीच में रोक दिया गया।
संविधान के अनुच्छेद 94सी के तहत सांसद अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव दे सकते हैं। इसके लिए 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी होता है। फिलहाल संसद 13 फरवरी के बाद अवकाश पर चली गई। इसलिए अब इस मामले पर 9 मार्च को चर्चा संभव है।
इधर, मंगलवार दोपहर को सदन में थोड़ी राहत भी दिखी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बजट पर चर्चा शुरू की। इससे लगा कि गतिरोध खत्म हो सकता है। लेकिन नोटिस के बाद माहौल फिर तनावपूर्ण हो गया।
इस नोटिस में विपक्ष ने तीन मुख्य आरोप लगाए। पहला, 2 फरवरी को नेता प्रतिपक्ष को पूरा बोलने नहीं दिया गया। दूसरा, 3 फरवरी को आठ सांसदों को अनुचित तरीके से निलंबित किया गया। तीसरा, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बयान पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसके अलावा, नोटिस में प्रधानमंत्री के भाषण से जुड़ा मुद्दा भी उठाया गया। विपक्ष का कहना है कि अध्यक्ष ने बिना ठोस आधार के कांग्रेस पर आरोप लगाए। उन्होंने इसे संवैधानिक पद का दुरुपयोग बताया।
हालांकि, सभी दल इस कदम से सहमत नहीं दिखे। तृणमूल कांग्रेस ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए। पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि टीएमसी संयम में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष को और समय मिलना चाहिए।
वहीं, भाजपा की 11 महिला सांसदों ने अध्यक्ष के समर्थन में पत्र लिखा। उन्होंने कांग्रेस की महिला सांसदों के पत्र पर आपत्ति जताई।
इस बीच, कांग्रेस व्हिप मणिकम टैगोर ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मजबूरी में यह कदम उठाया। उन्होंने इसे असाधारण हालात का नतीजा बताया।
अब कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि इस मुद्दे पर खुली चर्चा हो। राहुल गांधी भी बजट बहस में हिस्सा ले सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद का सियासी तापमान और बढ़ने की संभावना है।