सोमवार को लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया। विवाद का केंद्र राहुल गांधी की मांग बनी। वह बजट चर्चा से पहले बोलना चाहते थे। इसी कारण सदन का कामकाज ठप हो गया।
नतीजतन, लोकसभा को तीन बार स्थगित करना पड़ा। आखिरकार, दोपहर दो बजे फिर शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद अध्यक्ष ने पूरे दिन के लिए कार्यवाही रोक दी।
इससे पहले, दूसरे स्थगन के बाद सदन दोबारा बैठा। उस समय संध्या राय पीठ पर थीं। उन्होंने कांग्रेस सांसद शशि थरूर से बजट पर चर्चा शुरू करने को कहा।
हालांकि, थरूर ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष होने के नाते राहुल गांधी को पहले बोलने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कुछ अहम बिंदु रखने की बात कही।
इसके जवाब में, संध्या राय ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी बोलना चाहते हैं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने गांधी से शुरुआत करने को कहा।
इसके बाद, राहुल गांधी ने नया दावा किया। उन्होंने कहा कि सुबह स्पीकर ओम बिरला और विपक्षी नेताओं की बैठक हुई थी। उस बैठक में सहमति बनी थी कि वह पहले अपनी बात रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पीठ अपने वादे से पीछे हट रही है।
लेकिन, संध्या राय ने इस दावे से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे किसी समझौते की जानकारी नहीं है। साथ ही, उन्होंने नियमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बिना नोटिस कोई मुद्दा नहीं उठाया जा सकता।
इसी बीच, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने साफ कहा कि कोई समझौता नहीं हुआ। उन्होंने राहुल गांधी के दावे को खारिज किया। इसके अलावा, रिजिजू ने यह भी कहा कि कई सांसद बजट पर बोलना चाहते हैं। इसलिए सभी को मौका मिलना चाहिए। उन्होंने व्यापक चर्चा की जरूरत बताई।
इसके बावजूद, दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े रहे। कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। अंततः, संध्या राय ने सदन को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले भी दिन की शुरुआत हंगामे से हुई थी। विपक्षी सांसदों ने कई मुद्दे उठाए। उन्होंने तुरंत चर्चा की मांग की। इसी कारण सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा।
तब, स्पीकर ओम बिरला पीठ पर थे। उन्होंने सदस्यों से संयम बरतने को कहा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बजट बहस में सभी को बोलने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी भी खुलकर अपनी बात रख सकते हैं।
फिर भी, विपक्ष शांत नहीं हुआ। विरोध जारी रहा। स्पीकर ने इसे सुनियोजित बाधा बताया। उन्होंने नियमों के अनुसार सदन चलने देने की अपील की। लेकिन हंगामा थमा नहीं। इसलिए उन्होंने कार्यवाही कुछ समय के लिए रोक दी।
दोपहर 12 बजे सदन फिर बैठा। तब भी गतिरोध बना रहा। विपक्ष ने अपनी मांग दोहराई। उसने कहा कि पहले राहुल गांधी बोलें। बाद में, कृष्ण प्रसाद तेनेटी पीठ पर आए। उन्होंने फिर से थरूर को बोलने को कहा। लेकिन विपक्षी सांसदों ने विरोध किया। उन्होंने गांधी को प्राथमिकता देने की मांग की। इससे बहस आगे नहीं बढ़ सकी।
उधर, राज्यसभा में भी हालात खराब रहे। वहां विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट किया। उन्होंने विरोध जताया क्योंकि मल्लिकार्जुन खड़गे को लोकसभा का मुद्दा उठाने नहीं दिया गया। राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने खड़गे को दूसरे सदन के मामलों पर बोलने से रोका। खड़गे ने इसे संवैधानिक सवाल बताया। फिर भी, पीठ ने अनुमति नहीं दी।
इसके बाद, शून्यकाल में डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने नया मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया। अध्यक्ष ने कहा कि वह इस पर बाद में विचार करेंगे।
कुल मिलाकर, सोमवार को संसद में टकराव हावी रहा। बजट चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी। राजनीतिक खींचतान के कारण समय बर्बाद हुआ। अब सभी की नजरें आने वाले सत्रों पर टिकी हैं।