असम में राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस नेतृत्व आमने-सामने आ गए हैं। इस टकराव की शुरुआत एक AI-जनरेटेड वीडियो से हुई। इसके बाद पाकिस्तान से कथित “डीप लिंक” के आरोप सामने आए। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, विवाद और तेज होता जा रहा है।
सबसे पहले, असम बीजेपी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में मुख्यमंत्री को राइफल से निशाना लगाते हुए दिखाया गया। सामने दो लोगों की तस्वीरें थीं, जिनके सिर पर टोपी थी। पोस्ट पर “प्वाइंट ब्लैंक शॉट” लिखा था। इसके साथ राजनीतिक संदेश भी जोड़ा गया। बाद में पार्टी ने पोस्ट हटा लिया। लेकिन तब तक विवाद फैल चुका था।
इसके बाद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वीडियो को घृणित और खतरनाक बताया। नेताओं ने कहा कि यह अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है। उन्होंने इसे नफरत फैलाने वाला कंटेंट करार दिया। इसलिए उन्होंने सख्त कार्रवाई की मांग की।
इसी बीच, मुख्यमंत्री सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने कई दस्तावेज पेश किए। उन्होंने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गोगोई ने 2013 में चुपचाप पाकिस्तान यात्रा की। उन्होंने दावा किया कि गोगोई ने अधिकारियों को जानकारी नहीं दी। उन्होंने यह भी कहा कि गोगोई ने वहां प्रशिक्षण लिया होगा।
इसके अलावा, सरमा ने एक पुरानी तस्वीर का जिक्र किया। इस तस्वीर में गोगोई पाकिस्तान दूतावास के पास नजर आए। सरमा ने कहा कि इससे पाकिस्तान को वैध ठहराने की कोशिश दिखती है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा।
फिर, मुख्यमंत्री ने गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एलिजाबेथ ने 2011 से 2012 तक पाकिस्तान में काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वह भारत से जुड़ी जानकारी साझा करती थीं। उन्होंने यह भी कहा कि एलिजाबेथ कई बार पाकिस्तान गईं।
इसके साथ ही, सरमा ने पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख का नाम लिया। उन्होंने कहा कि गोगोई परिवार और शेख के बीच करीबी संबंध हैं। उन्होंने इसे भारत विरोधी साजिश बताया। उन्होंने केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की।
हालांकि, गौरव गोगोई ने सभी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस को “सी-ग्रेड फिल्म से भी खराब” बताया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। उन्होंने आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत करार दिया।
इसके बाद, गोगोई ने 12,000 बीघा जमीन विवाद उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री परिवार पर अवैध कब्जे का खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से सरकार पुराने मुद्दे उछाल रही है।
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी सरमा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने पद की गरिमा गिराई। उन्होंने सबूतों की कमी पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
पूर्व सांसद रिपुन बोरा ने भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि 2014 के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगर मामला गंभीर था, तो एजेंसियां पहले क्यों चुप रहीं।
अंत में, असम की राजनीति गहरे ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रही है। AI वीडियो से विवाद शुरू हुआ। पाकिस्तान लिंक के आरोपों ने आग में घी डाला। दोनों पक्ष लगातार हमले कर रहे हैं। आने वाले समय में यह टकराव चुनावी राजनीति की दिशा तय कर सकता है।