नई दिल्ली में बुधवार सुबह संसद का माहौल अचानक गर्म हो गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी बहस हुई। यह विवाद कांग्रेस सांसदों के प्रदर्शन के दौरान सामने आया।
सबसे पहले, कांग्रेस सांसद मकर द्वार के पास इकट्ठा हुए। उन्होंने आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन का विरोध किया। वे सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। वे सदन में बोलने का अधिकार मांग रहे थे।
इसी दौरान, केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू वहां से गुजरे। तभी राहुल गांधी ने उन पर टिप्पणी की। उन्होंने बिट्टू को “गद्दार दोस्त” कहा। उन्होंने इशारा करते हुए यह बात कही।
इसके बाद, राहुल गांधी ने हाथ बढ़ाया। उन्होंने हाथ मिलाने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “हैलो भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस आ जाओगे।”
हालांकि, बिट्टू ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। उन्होंने तुरंत जवाब दिया। उन्होंने राहुल गांधी को “देश का दुश्मन” कहा। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे सांसदों पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि वे ऐसे बैठे हैं जैसे जंग जीत ली हो।
जल्द ही यह बहस राजनीतिक गलियारों में फैल गई। मीडिया ने इस पर लगातार रिपोर्टिंग शुरू की। सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई।
बाद में, बिट्टू ने अपनी प्रतिक्रिया साफ की। उन्होंने गांधी परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार और 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने सिख समाज को गहरा दर्द दिया।
बिट्टू ने कहा कि वह गांधी परिवार के किसी सदस्य से हाथ नहीं मिलाएंगे। उन्होंने कहा कि एक सिख कभी ऐसे लोगों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने गांधी परिवार को सिखों के दर्द के लिए जिम्मेदार ठहराया।
इसके बाद, एक इंटरव्यू में बिट्टू ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें उकसाने की कोशिश की। उन्होंने आक्रामक व्यवहार का भी आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी नेताओं से सलाह लेंगे। जरूरत पड़ी तो वे विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएंगे।
इधर, दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सिख कभी गद्दार नहीं हो सकते। उन्होंने कांग्रेस की सोच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी की मानसिकता नहीं बदली है।
इसी बीच, सिख समुदाय ने कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने राहुल गांधी से माफी की मांग की। उन्होंने बयान को अपमानजनक बताया।
वहीं, कांग्रेस ने राहुल गांधी का बचाव किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि बिट्टू ने पार्टी छोड़कर विश्वासघात किया। इसलिए, ऐसे शब्दों का इस्तेमाल सही है। उन्होंने सरकार पर भी निशाना साधा।
कांग्रेस सांसद अमरिंदर राजा वारिंग ने कहा कि गद्दार के लिए इससे बेहतर शब्द नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी को बोलने क्यों नहीं दिया जाता।
यह विवाद उस समय हुआ, जब संसद पहले से तनाव में थी। इससे पहले, लोकसभा ने आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किया था। अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन और हंगामे का हवाला दिया।
निलंबित सांसदों में हिबी ईडन, राजा वारिंग, मणिकम टैगोर, गुरजीत औजला, प्रशांत पाडोले, चामला रेड्डी, डीन कुरियाकोसे और सीपीएम नेता एस वेंकटेशन शामिल हैं।
पिछले कुछ समय से संसद में लगातार हंगामा हो रहा है। विपक्ष सरकार पर आवाज दबाने का आरोप लगाता है। वहीं, सरकार नियम तोड़ने की बात कहती है।
राहुल-बिट्टू विवाद ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। इसने नीति से ज्यादा व्यक्तिगत हमलों को चर्चा में ला दिया है।
आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। दोनों दल सख्त रुख अपनाने के संकेत दे रहे हैं। फिलहाल, यह टकराव संसद की बिगड़ती राजनीति का नया उदाहरण बन गया है।