राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कश्मीर में अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। सोमवार को NIA ने घाटी के कई जिलों में छापेमारी की। एजेंसी ने यह कदम आतंकी साजिश से जुड़े मामलों की जांच के तहत उठाया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता दिखा दी।
सबसे पहले NIA की टीमें श्रीनगर पहुंचीं। इसके बाद उन्होंने बारामूला और बांदीपोरा में तलाशी अभियान चलाया। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इन अभियानों में सहयोग दिया। वहीं, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने सुरक्षा मोर्चा संभाला। संयुक्त टीमों ने कई रिहायशी ठिकानों को निशाने पर लिया।
सूत्रों के अनुसार, NIA ने उन लोगों के घरों की तलाशी ली, जिन पर आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने का शक है। इनमें जमात-ए-इस्लामी से कथित रूप से जुड़ा एक व्यक्ति शामिल है। इसके अलावा, एक सरकारी कर्मचारी और एक पूर्व आतंकी के घर भी जांच के दायरे में आए। एजेंसी इन सभी के संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल कर रही है।
यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। दिसंबर में भी NIA ने इसी तरह की बड़ी कार्रवाई की थी। तब एजेंसी ने कश्मीर और लखनऊ में एक साथ छापे मारे थे। यह छापेमारी दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच से जुड़ी थी।
10 नवंबर को हुए उस धमाके ने देश को झकझोर दिया था। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 32 लोग घायल हुए थे। जांच के दौरान एजेंसियों ने एक आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया था। इसके बाद NIA ने इस मामले की कमान संभाली।
दिसंबर की कार्रवाई में NIA ने जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में तलाशी ली थी। एजेंसी ने शोपियां, कुलगाम, पुलवामा और अवंतीपोरा में ठिकानों की जांच की। साथ ही, लखनऊ में भी एक स्थान पर छापा मारा गया। ये सभी ठिकाने गिरफ्तार आरोपियों और संदिग्धों से जुड़े थे।
उस दौरान NIA को अहम सबूत मिले थे। एजेंसी ने कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए थे। इसके अलावा, कुछ अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी हाथ लगी थी। NIA ने तब कहा था कि यह सामग्री आतंकी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में मदद करेगी। एजेंसी को उम्मीद थी कि इससे फंडिंग, संपर्कों और साजिश की परतें खुलेंगी।
सोमवार की छापेमारी उसी जांच की अगली कड़ी मानी जा रही है। एजेंसी अब स्थानीय स्तर पर नेटवर्क की भूमिका समझना चाहती है। NIA यह भी जानना चाहती है कि किन लोगों ने लॉजिस्टिक या वैचारिक समर्थन दिया।
सरकारी कर्मचारी के घर पर छापे ने मामले को और गंभीर बना दिया है। जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में खास सतर्कता बरतती हैं। वे यह जांचती हैं कि कहीं पद या पहुंच का गलत इस्तेमाल तो नहीं हुआ। वहीं, पूर्व आतंकी के संपर्क भी एजेंसी के लिए अहम संकेत माने जा रहे हैं।
फिलहाल, NIA ने यह साफ नहीं किया है कि सोमवार की कार्रवाई में किसी की गिरफ्तारी हुई या नहीं। एजेंसी ने जब्त सामग्री या पूछताछ पर भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।
कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार दबाव बना रही हैं। NIA की यह कार्रवाई उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस जांच से और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।