नई दिल्ली में शुक्रवार को भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर बड़ा संकेत मिला। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता अब समापन की ओर बढ़ रही है। उन्होंने साफ किया कि अब कोई भी “स्टिकी इश्यू” बाकी नहीं है। इसलिए दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और यूरोपीय संघ ने हाल ही में मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सफल बातचीत पूरी की है। इसी पृष्ठभूमि में गोयल ने भारत की बदली हुई व्यापार रणनीति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत अब पुराने संरक्षणवादी रवैये से बाहर निकल चुका है। अब देश भविष्य की 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर आत्मविश्वास से बातचीत करता है।
गोयल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित देशों से जुड़ाव जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी देश अलग-थलग रहकर आगे नहीं बढ़ सकता। इसी सोच के तहत भारत अमेरिका, यूरोप और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहा है।
यूरोपीय संघ के साथ बातचीत को लेकर गोयल ने बताया कि 2022 से ही यूरोप का रुख सकारात्मक रहा। उन्होंने कहा कि यूरोपीय पक्ष शुरू से ही भारत के साथ समझौते को लेकर गंभीर था। हालांकि, 2024 में दोनों पक्षों के चुनावों के कारण बातचीत की गति कुछ समय के लिए धीमी हुई। इसके बाद सितंबर-अक्टूबर में नई यूरोपीय सरकार बनी। फिर यूरोप ने अपने सबसे अनुभवी आयुक्त मारोश शेफचोविच को जिम्मेदारी सौंपी।
गोयल के अनुसार, शेफचोविच ने कई बार उनसे मुलाकात की और बातचीत को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने शुरुआत में ही यह तय किया कि संवेदनशील मुद्दों को अलग रखा जाएगा। इस रणनीति ने बातचीत को आसान बनाया और समाधान की राह खोली।
समझौते के अनुमोदन को लेकर भी गोयल ने भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि कानूनी जांच में कुछ महीने लगते हैं। इसके बाद समझौता यूरोपीय संसदों में जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि 2026 के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
कार्बन टैक्स और सीबीएएम जैसे मुद्दों पर भी गोयल ने संतोष जताया। उन्होंने कहा कि यूरोप भारत के जलवायु प्रयासों को समझता है। साथ ही, समझौते में सुरक्षा प्रावधान भी शामिल हैं, ताकि भारत के व्यापार को नुकसान न हो।
श्रम और प्रतिभा की आवाजाही पर बोलते हुए गोयल ने कहा कि कई यूरोपीय देशों में कुशल श्रमिकों की कमी है। भारत उच्च कौशल वाले पेशेवर उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी कानून का पालन करते हैं और यही कारण है कि विकसित देश भारतीय प्रतिभा को प्राथमिकता देते हैं।
अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता पर लौटते हुए गोयल ने कहा कि बातचीत सकारात्मक रही है। भारत किसी भी समझौते पर समय सीमा तय करके बात नहीं करता। सरकार तभी समझौता करती है, जब दोनों पक्ष संतुष्ट हों। उन्होंने दोहराया कि अब कोई अटका मुद्दा नहीं है और बातचीत निर्णायक मोड़ पर है।
अंत में, गोयल ने सरकार की आगे की प्राथमिकताएं गिनाईं। उन्होंने कहा कि विनिर्माण, सेवाओं, नवाचार, स्टार्टअप और निर्यात पर सरकार का फोकस रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि कोई भी देश वैश्विक जुड़ाव के बिना विकसित नहीं बना। भारत भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।