ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने अपनी सैन्य तैयारी का संकेत दिया है। शुक्रवार को ईरानी मीडिया ने बताया कि ईरान ने 1,000 नए “रणनीतिक ड्रोन” अपनी सशस्त्र सेनाओं में शामिल किए हैं। यह कदम संभावित अमेरिकी हमलों की आशंका के बीच सामने आया है।
तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, ये ड्रोन सेना की चारों शाखाओं को मजबूत करेंगे। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े इस मीडिया संस्थान ने कहा कि यह तैनाती प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए की गई है। इसके साथ ही तेहरान ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह किसी भी खतरे के लिए तैयार है।
उधर, अमेरिका ने भी दबाव बढ़ाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इन विकल्पों में परमाणु ठिकानों पर विशेष कमांडो कार्रवाई भी शामिल है। हालांकि, ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि वह सैन्य बल का इस्तेमाल टालना चाहते हैं।
इसके बावजूद, बयान और कार्रवाई के बीच फर्क दिख रहा है। अमेरिका ने मध्य पूर्व में एक और युद्धपोत भेजा है। इससे पहले, सोमवार को एक अमेरिकी नौसैनिक स्ट्राइक ग्रुप क्षेत्र में पहुंचा था। ट्रंप ने कहा कि यह समूह “तैयार और सक्षम” है।
पृष्ठभूमि में, ईरान के भीतर हालिया विरोध प्रदर्शनों ने हालात को और जटिल बनाया है। दिसंबर के अंत में शुरू हुए सरकार-विरोधी प्रदर्शन जनवरी की शुरुआत में चरम पर पहुंचे। सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई की। रॉयटर्स के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने हजारों लोगों को हिरासत में लिया ताकि आंदोलन आगे न बढ़े।
पहले ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि प्रदर्शनकारियों की मौत हुई तो अमेरिका कार्रवाई कर सकता है। अब उन्होंने फोकस बदल दिया है। हालिया बयानों में उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जोर दिया। पश्चिमी देश मानते हैं कि यह कार्यक्रम परमाणु हथियार क्षमता की ओर बढ़ रहा है।
बुधवार को ट्रंप ने कहा कि समझौते के लिए समय खत्म हो रहा है। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका इंतजार नहीं करेगा। इसके बाद, तेहरान ने भी सख्त रुख अपनाया।
ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरामिनिया ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी अमेरिकी कदम का जवाब सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिक्रिया तुरंत और निर्णायक होगी। उन्होंने पिछले साल जून की घटनाओं से तुलना की, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सीमित हवाई कार्रवाई की थी।
इसी बीच, इजरायल ने संयुक्त कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। इजरायली अधिकारी चाहते हैं कि अमेरिका ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर नए हमलों में शामिल हो। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ईरान ने पिछले साल हुए नुकसान के बाद अपनी मिसाइल क्षमता काफी हद तक बहाल कर ली है। इजरायल इसे सीधा खतरा मानता है।
यूरोप ने भी कड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को यूरोपीय संघ ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को आतंकवादी संगठन घोषित किया। यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को कुचलने वाले शासन के लिए यही सही शब्द है।
इसके साथ ही, यूरोपीय संघ ने 21 ईरानी अधिकारियों और संस्थाओं पर वीजा प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीज करने का फैसला लिया। सूची में गृह मंत्री, अभियोजक जनरल और क्षेत्रीय आईआरजीसी कमांडर शामिल हैं।
ईरान ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे बड़ी रणनीतिक गलती बताया। ईरानी सेना ने यूरोपीय संघ पर अमेरिका और इजरायल के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।
फिलहाल, बातचीत और टकराव साथ-साथ चल रहे हैं। ट्रंप संवाद की बात करते हैं। तेहरान ताकत दिखाता है। ड्रोन तैनात होते हैं। युद्धपोत आगे बढ़ते हैं। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी चूक का खतरा बढ़ता जा रहा है।