बारामती गुरुवार सुबह खामोश नजर आया। शहर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को अंतिम विदाई देने के लिए जुटा। बुधवार को हुए विमान हादसे ने राज्य को झकझोर दिया। इस हादसे ने महाराष्ट्र की राजनीति का एक अहम अध्याय खत्म कर दिया।
सुबह होते ही भीड़ उमड़ने लगी। सबसे पहले अजित पवार का परिवार पहुंचा। इसके बाद पार्टी कार्यकर्ता आए। समर्थक और स्थानीय लोग भी सड़कों पर दिखे। सभी का रुख विद्या प्रतिष्ठान मैदान की ओर रहा। माहौल पूरी तरह शोक में डूबा रहा।
इसी बीच प्रशासन ने व्यवस्था संभाली। पुलिस ने सुरक्षा घेरे बनाए। स्वयंसेवकों ने भीड़ को दिशा दी। अधिकारियों ने अंतिम संस्कार की तैयारियां तेज कीं। राज्य सरकार ने अजित पवार के सम्मान में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया।
इसके बाद पार्थिव शरीर लाया गया। तिरंगे में लिपटा अजित पवार का पार्थिव शरीर विद्या प्रतिष्ठान मैदान पहुंचा। लोगों ने हाथ जोड़कर श्रद्धांजलि दी। कई समर्थकों की आंखें नम रहीं। नारे और सन्नाटा एक साथ महसूस हुआ।
उसी समय बड़े नेता बारामती पहुंचे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अंतिम संस्कार में शामिल होने आए। उन्होंने परिवार से मुलाकात की और श्रद्धांजलि दी। उनकी मौजूदगी ने इस क्षण को राष्ट्रीय महत्व दिया।
इसके साथ ही शरद पवार भी पहुंचे। एनसीपी प्रमुख शरद पवार परिवार के साथ खड़े दिखे। विभिन्न दलों के नेता उनके साथ नजर आए। राजनीतिक मतभेद इस मौके पर पीछे चले गए।
जैसे-जैसे समय बढ़ा, भीड़ और बढ़ी। बारामती ही नहीं, आसपास के जिलों से लोग पहुंचे। कई समर्थक पार्टी के झंडे लेकर आए। कुछ लोग अजित पवार की तस्वीरें थामे दिखे। लोग उनके फैसलों और विकास कार्यों को याद करते रहे।
बुधवार को हादसे की खबर तेजी से फैली थी। अजित पवार स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़े कार्यक्रमों के लिए यात्रा पर थे। तभी बारामती के पास विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रशासन ने तुरंत जांच शुरू की।
इसके बाद से श्रद्धांजलियों का सिलसिला जारी रहा। राज्य और केंद्र के नेताओं ने दुख जताया। आम लोगों ने भी सोशल मीडिया पर संवेदनाएं व्यक्त कीं। समर्थकों ने उन्हें मजबूत नेता और जमीनी राजनेता बताया।
अंतिम संस्कार के दौरान भावनाएं चरम पर रहीं। परिवार ने विधि-विधान के साथ संस्कार किए। समर्थक दूर से शांत भाव से देखते रहे। “अजित दादा अमर रहें” के नारे गूंजते रहे।
इसी दौरान प्रशासन ने राजकीय सम्मान सुनिश्चित किया। पुलिस बैंड मौजूद रहा। सलामी दी गई। सभी प्रक्रियाएं तय नियमों के अनुसार चलीं।
दोपहर होते-होते अंतिम विदाई पूरी हुई। भीड़ अनुशासन में रही। स्वयंसेवकों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। पूरा माहौल गंभीर बना रहा।
अजित पवार का राजनीतिक सफर लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने कई सरकारों में अहम भूमिका निभाई। उपमुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने बार-बार जिम्मेदारी संभाली। उनकी राजनीतिक पकड़ दशकों तक बनी रही।
आज बारामती ने अपने नेता को विदा किया। जिस शहर से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ, वही शहर गवाह बना। हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह साफ किया कि अजित पवार की छाप लंबे समय तक बनी रहेगी।