नई दिल्ली में आज गणतंत्र दिवस की शुरुआत श्रद्धा और सम्मान के साथ हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को नमन किया। इस मौके पर उन्होंने देश का नेतृत्व करते हुए बलिदान को याद किया। यह परंपरा हर वर्ष गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों की शुरुआत करती है।
सबसे पहले, प्रधानमंत्री सुबह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे। स्मारक इंडिया गेट के पास स्थित है। यह स्थल थलसेना, नौसेना और वायुसेना के शहीदों को समर्पित है। पीएम मोदी ने अमर जवान ज्योति के पास पुष्पचक्र अर्पित किया। इसके बाद उन्होंने कुछ क्षण मौन रखा। इस मौन ने पूरे देश की कृतज्ञता को स्वर दिया।
इसके साथ ही, यह समारोह गणतंत्र दिवस की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। हर साल प्रधानमंत्री इसी तरह शहीदों को श्रद्धांजलि देकर दिन की शुरुआत करते हैं। यह परंपरा उत्सव को बलिदान से जोड़ती है। यह संदेश देती है कि लोकतंत्र की नींव सैनिकों के साहस पर टिकी है।
इसी बीच, देश आज 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान लागू किया था। तभी से यह दिन राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बना हुआ है। गणतंत्र दिवस भारत की लोकतांत्रिक यात्रा को रेखांकित करता है।
इसके बाद, राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने प्रमुख इलाकों में निगरानी रखी। कर्तव्य पथ के आसपास यातायात नियंत्रित रहा। प्रशासन ने कार्यक्रमों के सुचारू संचालन पर ध्यान दिया।
वहीं, सभी की निगाहें कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड पर टिकी रहीं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू परेड की सलामी लेंगी। विदेशी मेहमान भी समारोह में शामिल हुए। परेड में भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी प्रगति झलकी। हालांकि, सुबह का श्रद्धांजलि कार्यक्रम पूरे दिन के भाव को तय करता है।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का अपना विशेष महत्व है। सरकार ने इसे 2019 में राष्ट्र को समर्पित किया था। तब से यह राष्ट्रीय स्मरण का केंद्र बन गया है। यहां स्वतंत्रता के बाद विभिन्न युद्धों और अभियानों में शहीद हुए सैनिकों के नाम अंकित हैं। यह स्थल आने वाली पीढ़ियों को बलिदान की याद दिलाता है।
प्रधानमंत्री मोदी लगातार सशस्त्र बलों की भूमिका को रेखांकित करते रहे हैं। वे अपने भाषणों में सैनिकों के साहस और अनुशासन की बात करते हैं। उन्होंने पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण पर भी जोर दिया है। आज की श्रद्धांजलि उसी सोच को दर्शाती है।
इसके अलावा, यह कार्यक्रम नागरिक और सैन्य नेतृत्व के बीच सम्मानजनक संबंध को दिखाता है। देश का निर्वाचित नेतृत्व खुले मंच से सेना को सम्मान देता है। इससे संस्थाओं के बीच विश्वास मजबूत होता है। साथ ही, यह वैश्विक स्तर पर भी एक सकारात्मक संदेश देता है।
देश के अन्य हिस्सों में भी गणतंत्र दिवस मनाया गया। राज्यों और जिलों में ध्वजारोहण हुआ। स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। लोगों ने टीवी और डिजिटल माध्यमों से राष्ट्रीय समारोह देखा।
जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, गर्व और स्मरण की भावना बनी रही। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हुआ यह समारोह याद दिलाता है कि आजादी की कीमत बहुत बड़ी रही है। यह बलिदान को उत्सव के केंद्र में रखता है।
अंत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई श्रद्धांजलि ने 77वें गणतंत्र दिवस को एक गरिमामय शुरुआत दी। इस क्षण ने शहीदों के प्रति देश की कृतज्ञता को फिर से मजबूत किया। साथ ही, इसने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दोहराया।