तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। बुधवार को राज्य की राजनीति में दो बड़े घटनाक्रम सामने आए। इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि बड़े गठबंधन अपनी ताकत समेट रहे हैं। वहीं, छोटे गुट तेजी से कमजोर पड़ रहे हैं।
सबसे पहले, टीटीवी दिनाकरन ने बड़ा फैसला लिया। उनकी पार्टी अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम ने औपचारिक रूप से एनडीए में वापसी कर ली। दिनाकरन ने चेन्नई में बीजेपी नेताओं से मुलाकात के बाद इसका ऐलान किया। बैठक में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल मौजूद रहे। एल मुरुगन और नैनार नागेन्द्रन भी बैठक में शामिल हुए।
इसके बाद, पीयूष गोयल ने दिनाकरन के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एनडीए पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन सत्तारूढ़ डीएमके को हराने के लिए तैयार है। उन्होंने एनडीए को सुशासन, सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक पहचान का मंच बताया।
दिनाकरन के लिए यह फैसला आसान नहीं था। कभी वह एडप्पादी के पलानीस्वामी के सबसे मुखर आलोचक रहे। अब उन्होंने सुर बदला है। उन्होंने पुराने टकराव को सहयोगियों के बीच मतभेद बताया। उनके मुताबिक, डीएमके को सत्ता से हटाना सबसे बड़ा लक्ष्य है। इसलिए पुराने विवादों को पीछे छोड़ना जरूरी है।
गौरतलब है कि एएमएमके ने पिछले साल एनडीए से दूरी बनाई थी। तब बीजेपी ने एआईएडीएमके से फिर हाथ मिलाया था। दिनाकरन ने उस वक्त उपेक्षा का आरोप लगाया था। अब हालात बदले हैं। सीट बंटवारे की शुरुआती बातचीत शुरू हो चुकी है। चुनावी रणनीति आकार ले रही है।
इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को मदुरांतकम के पास रैली करने वाले हैं। इस रैली को अहम माना जा रहा है। यहां दिनाकरन और पलानीस्वामी एक ही मंच पर दिख सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो यह 2017 के बाद पहला मौका होगा, जब दोनों साथ नजर आएंगे।
इधर, डीएमके ने भी उसी दिन बड़ा दांव खेला। पार्टी ने आर वैथिलिंगम को अपने साथ जोड़ लिया। यह शामिलीकरण चेन्नई स्थित अन्ना अरिवालयम में हुआ। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन मौके पर मौजूद रहे।
वैथिलिंगम तंजावुर जिले की ओरथानाडु सीट से विधायक हैं। वह एआईएडीएमके सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। सबसे अहम बात यह है कि वह ओ पन्नीरसेल्वम के सबसे भरोसेमंद सहयोगी माने जाते थे। उनके डीएमके में जाने से OPS का संगठनात्मक आधार लगभग खत्म हो गया है।
वैथिलिंगम ने अपने फैसले के पीछे कारण भी गिनाए। उन्होंने कहा कि पलानीस्वामी के नेतृत्व में एआईएडीएमके ठीक से काम नहीं कर रही है। उन्होंने पार्टी पर तानाशाही रवैये का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, आंतरिक लोकतंत्र कमजोर पड़ चुका है।
इसके बाद, उन्होंने विचारधारा की बात की। उन्होंने सी एन अन्नादुरई की विरासत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि डीएमके ही असली द्रविड़ राजनीति की प्रतिनिधि है। उन्होंने माना कि चुनाव नजदीक हैं। OPS खेमे में असमंजस बना हुआ है। इसी वजह से उन्हें फैसला लेना पड़ा।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एआईएडीएमके ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से लौटने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन उन्होंने शर्त रखी। उन्होंने कहा कि जब तक पार्टी के गुट एक नहीं होते, वह वापसी नहीं करेंगे। चूंकि ऐसा नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने डीएमके का रास्ता चुना।
कुल मिलाकर, बुधवार के घटनाक्रम ने साफ संदेश दिया है। बड़े गठबंधन अब तेजी से खुद को मजबूत कर रहे हैं। छोटे और बिखरे गुट हाशिये पर जा रहे हैं। OPS खेमा लगभग खाली हो चुका है। दिनाकरन ने अलग-थलग रहने के बजाय गठबंधन की राह चुनी है।
आने वाले हफ्तों में और समीकरण बदल सकते हैं। चुनावी मैदान अब पूरी तरह तैयार हो रहा है। तमिलनाडु की सियासत निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ चुकी है।