अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप से कहा: भारत से दालों पर आयात शुल्क घटाएँ, अमेरिकी किसानों को मिले लाभ
वॉशिंगटन – अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आग्रह किया कि भारत के साथ किसी भी भविष्य के व्यापार समझौते में दालों (pulse crops) पर अनुकूल प्रावधान शामिल किए जाएँ। सांसदों का कहना है कि अमेरिकी उत्पादक भारत द्वारा लगाए गए “अन्यायपूर्ण” शुल्कों के कारण “गंभीर प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान” झेल रहे हैं।
16 जनवरी को लिखे गए पत्र में रिपब्लिकन सांसद स्टीव डाइन्स (मॉन्टाना) और केविन क्रेमर (नॉर्थ डकोटा) ने बताया कि उनके राज्य अमेरिका में दालों के प्रमुख उत्पादक हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और वैश्विक खपत का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा भारत में होता है।
सांसदों ने कहा कि मसूर, चना, सूखी बीन्स और मटर जैसी दालों की किस्मों पर भारत ने अमेरिकी निर्यातकों पर भारी शुल्क लगा रखा है। उन्होंने बताया कि भारत ने पिछले साल 30 अक्टूबर को पीली मटर पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क घोषित किया, जो 1 नवंबर 2025 से लागू हुआ। उन्होंने लिखा, “अन्यायपूर्ण शुल्कों के कारण अमेरिकी उत्पादकों को भारत में अपने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्यात में गंभीर प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान झेलना पड़ रहा है।”
डाइन्स और क्रेमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दालों पर शुल्क को लेकर बातचीत करना दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा। इससे अमेरिकी उत्पादकों और भारतीय उपभोक्ताओं दोनों को फायदा मिलेगा। उन्होंने ट्रंप का धन्यवाद किया कि वे नॉर्थ डकोटा और मॉन्टाना के किसानों के लिए अनुकूल आर्थिक माहौल सुनिश्चित करने में प्रयासरत हैं।
सांसदों ने याद दिलाया कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया था। 2020 में भारत के साथ व्यापार वार्ता से पहले उन्होंने ट्रंप को पत्र सौंपा था। राष्ट्रपति ने यह पत्र सीधे प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा था, जिससे अमेरिकी उत्पादक वार्ता की मेज पर आए।
पत्र में सांसदों ने लिखा, “अमेरिका जब व्यापार असंतुलन सुधारने की कोशिश करता है, तो अमेरिकी किसान वैश्विक खाद्य और ऊर्जा आपूर्ति में मदद करने के लिए तैयार हैं। उन्हें बस व्यापार के अवसर मिलें।”
उन्होंने बताया कि 2020 के पत्र में उन्होंने कहा था कि भारत के अन्यायपूर्ण शुल्कों ने अमेरिकी दाल उत्पादकों को काफी नुकसान पहुँचाया। खासकर जून 2019 में भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (GSP) से हटाए जाने के बाद अतिरिक्त शुल्कों ने अमेरिकी निर्यातकों को प्रभावित किया।
अमेरिकी सांसदों का कहना है कि ट्रंप को भारत के साथ किसी भी नए व्यापार समझौते में अमेरिकी दाल उत्पादकों के हितों की रक्षा करनी चाहिए और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाना चाहिए।
