ईरान ने 800 लोगों की फांसी की योजना से कदम पीछे खींच लिए। गुरुवार को व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि की। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद सामने आया। इससे पहले अमेरिका ने साफ संकेत दिए कि हालात बिगड़े तो वह सैन्य विकल्प भी खुले रखेगा।
दरअसल, ईरान इस समय देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, सरकारी कार्रवाई में अब तक 2,600 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। इसी पृष्ठभूमि में बड़े पैमाने पर फांसी की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी थी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम ने ईरानी अधिकारियों को सीधे चेतावनी दी। उन्होंने प्रस्तावित फांसी को प्रदर्शनकारियों पर हिंसक दमन से जोड़ा। लेविट के मुताबिक, ट्रंप को जानकारी मिली कि जिन 800 फांसियों की योजना थी, वे फिलहाल रुक गई हैं।
इसके साथ ही लेविट ने साफ किया कि राष्ट्रपति सभी विकल्प खुले रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही, तो ईरान को गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे। ट्रंप प्रशासन ने यह संदेश बिना किसी नरमी के तेहरान तक पहुंचाया।
इस पुष्टि से कुछ घंटे पहले अमेरिका ने ईरान के पांच अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने इन अधिकारियों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की साजिश रचने का आरोप लगाया। साथ ही वॉशिंगटन ने ईरानी नेताओं के विदेशी बैंक खातों में हो रहे वित्तीय लेन-देन की निगरानी भी शुरू कर दी। इससे ईरान पर दबाव और तेज हो गया।
लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। उन्हें ईरानी पक्ष से यह भरोसा मिला कि न तो फांसी दी जाएगी और न ही विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी हत्याएं होंगी। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह चेतावनी बेहद स्पष्ट और निर्णायक थी।
इसी बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद कहा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्या रुक गई है। वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि फांसियां भी नहीं होंगी। ट्रंप ने यह टिप्पणी कई दिनों की धमकियों और बढ़ते तनाव के बाद दी।
इस पूरे घटनाक्रम में एक नाम खास तौर पर चर्चा में रहा। 26 वर्षीय ईरानी प्रदर्शनकारी एरफान सोलतानी को हाल ही में हिरासत में लिया गया था। उनके परिवार को आशंका थी कि उन्हें जल्द फांसी दी जा सकती है। बाद में परिवार ने बताया कि फांसी टाल दी गई है। हालांकि, ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने कहा कि सोलतानी को अब तक मौत की सजा नहीं सुनाई गई है।
दूसरी ओर, ईरान ने फांसी की योजनाओं से इनकार किया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि सरकार का फांसी देने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि फांसी देना सवाल से बाहर है। गौरतलब है कि ईरान में ऐतिहासिक रूप से फांसी सजा का इस्तेमाल होता रहा है।
फिलहाल, ट्रंप की चेतावनी और अमेरिकी दबाव ने ईरान को पीछे हटने पर मजबूर किया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब भी हालात पर नजर बनाए हुए है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि तेहरान अपने वादों पर कितना अमल करता है।