ईरान में हिंसा चरम पर, 2,500 से ज्यादा मौतें; ट्रंप का ऐलान—मदद रास्ते में, तेहरान ने अमेरिका पर लगाया उकसाने का आरोप
khabarworld 14/01/2026 0
ईरान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। देशभर में जारी विरोध प्रदर्शन हर दिन ज्यादा हिंसक हो रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 2,500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। इस बीच अमेरिका, यूरोप और संयुक्त राष्ट्र ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को चेतावनी दी है और प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने का दावा किया है।
सबसे पहले, मौतों का आंकड़ा चिंता बढ़ाता है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि अब तक कम से कम 2,571 लोग मारे गए हैं। संगठन स्थानीय सूत्रों और परिवारों से जानकारी जुटाता है। दूसरी ओर, ईरान के सरकारी टीवी ने भी भारी जनहानि मानी है। चैनल ने मृतकों को “शहीद” बताया। उसने हिंसा के लिए सशस्त्र और आतंकी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। मार्टियर्स फाउंडेशन के प्रमुख अहमद मौसवी ने भी यही दावा दोहराया।
इसी बीच, संचार पर लगी पाबंदियां आंशिक रूप से हटी हैं। ईरानी सरकार ने कई दिनों बाद अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल की अनुमति दी। लोग अब विदेश में कॉल कर सकते हैं। हालांकि, विदेश से ईरान में कॉल अब भी नहीं लग रही है। एसएमएस सेवा अब भी बंद है। इंटरनेट पर सख्ती जारी है। ईरान के भीतर उपयोगकर्ता केवल सरकारी वेबसाइटों तक पहुंच पा रहे हैं। वैश्विक प्लेटफॉर्म अब भी बंद हैं। इससे सूचना का प्रवाह सीमित बना हुआ है।
इसके बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान सामने आए। ट्रंप ने ईरानियों से प्रदर्शन जारी रखने की अपील की। उन्होंने लोगों से संस्थानों पर कब्जा करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। ट्रंप ने इसे प्रदर्शनकारियों की हत्या से जोड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि “मदद रास्ते में है” और दोषियों को भारी कीमत चुकानी होगी।
इसके अलावा, ट्रंप ने सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देता है तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका बहुत मजबूत कार्रवाई करेगा। उन्होंने जीत को अपना लक्ष्य बताया। साथ ही, उन्होंने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा दल के साथ हालात की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि हत्याओं का पैमाना गंभीर है। उन्होंने ईरानी सरकार के रवैये को गलत बताया और उससे मानवता दिखाने की अपील की।
उधर, ईरान ने अमेरिका पर सीधा आरोप लगाया। तेहरान ने ट्रंप पर हिंसा भड़काने और देश को अस्थिर करने का आरोप लगाया। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत अमीर सईद इरावानी ने सुरक्षा परिषद को पत्र लिखा। उन्होंने अमेरिका और इजरायल को नागरिक मौतों का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने खास तौर पर युवाओं की मौतों का जिक्र किया।
साथ ही, ईरानी नेताओं की भाषा और तीखी हो गई। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को “मुख्य हत्यारे” बताया। उन्होंने यह बयान सोशल मीडिया पर दिया। ईरान के यूएन मिशन ने भी अमेरिका पर सैन्य हस्तक्षेप का बहाना बनाने का आरोप लगाया। मिशन ने कहा कि अमेरिकी नीति प्रतिबंधों, धमकियों और अराजकता पर टिकी है। उसने दावा किया कि यह रणनीति फिर विफल होगी।
इसी दौरान, ईरान को कूटनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। कई देशों ने ईरानी राजदूतों को तलब किया है। फिनलैंड ने इंटरनेट बंदी के बाद यह कदम उठाया। फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन ने कहा कि इंटरनेट बंद कर दमन किया जा रहा है। उन्होंने इसे अस्वीकार्य बताया। नीदरलैंड्स ने भी अत्यधिक बल प्रयोग और गिरफ्तारियों पर विरोध जताया। फ्रांस ने कार्रवाई को अमानवीय करार दिया। जर्मनी ने भी बर्लिन में ईरानी राजदूत को बुलाया और हिंसा रोकने की मांग की।
इसके अलावा, प्रतिबंधों की घोषणा हुई। ब्रिटेन ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने की योजना बताई। ये प्रतिबंध वित्त, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों को निशाना बनाएंगे। यूरोपीय संघ ने भी नए प्रतिबंधों का ऐलान किया। यूरोपीय आयोग प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बढ़ती मौतों की निंदा की।
अंत में, संयुक्त राष्ट्र ने हस्तक्षेप किया। मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टुर्क ने ईरान से हिंसा तुरंत रोकने को कहा। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर जोर दिया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आतंकी बताने की नीति की आलोचना की।
कुल मिलाकर, ईरान गहरे संकट में फंसा है। घरेलू विरोध तेज है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। फिलहाल, हालात सुधरते नहीं दिखते।
