सेंसेक्स में 500 अंकों की गिरावट: वैश्विक अनिश्चितता, तकनीकी कमजोरी और निवेशकों की सतर्कता प्रभावित कर रही बाजार

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मुंबई — सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली ने जोर पकड़ा। सेंसेक्स लगभग 500 अंक गिरकर 83,123.78 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 25,556.70 पर आ गया। घरेलू और वैश्विक कारणों से निवेशकों की जोखिम क्षमता कमजोर हुई और व्यापक नुकसान दर्ज हुआ।

सबसे पहले, वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार को प्रभावित किया। Geojit Investments के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, भारत-विशेष मुद्दों और वैश्विक घटनाओं ने बाजार को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर मिश्रित संकेत, ईरान और वेनेज़ुएला में बढ़ते तनाव, और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड संबंधी बयान निवेशकों में सतर्कता बढ़ा रहे हैं। इन घटनाओं ने भारत वोलैटिलिटी इंडेक्स (India VIX) को भी बढ़ाया, जिससे बाजार में अस्थिरता के संकेत मिले।

इसके साथ ही, तकनीकी कमजोरी ने भी गिरावट को तेज किया। निफ्टी 50 ने सुबह सत्र में पिछले दिन के निचले स्तर से नीचे गिरकर नया लो बनाया। यह संकेत देता है कि बाजार में अल्पकालिक नकारात्मक रुझान मजबूत है। निफ्टी अब 25,444 और 25,140 के मुख्य समर्थन स्तरों की ओर बढ़ रहा है। एनालिस्टों ने कहा कि निफ्टी ने कई छोटे समर्थन स्तर तोड़ दिए हैं और अब यह 100-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (25,600–25,550) के पास स्थिर है। RSI और MACD जैसे तकनीकी संकेतक नकारात्मक क्षेत्र में हैं, जो लगातार बिकवाली का संकेत दे रहे हैं। बैंक निफ्टी भी कमजोर प्रदर्शन कर रहा है और प्रमुख बैंक शेयर कोई नेतृत्व नहीं दे रहे।

तीसरा कारण निवेशकों की सतर्कता है। Q3 वित्तीय परिणामों से पहले निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपनाए हुए हैं। Enrich Money के CEO पोन्मुदि आर ने कहा कि वैश्विक संकेत मिश्रित रहने के कारण भारतीय शेयर बाजार ने नकारात्मक शुरुआत की। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली, भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ से जुड़ी चिंताओं ने जोखिम क्षमता को और कम कर दिया।

विशेष रूप से, ईरान में बढ़ती नागरिक अशांति और संभावित अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप पर चर्चा ने निवेशकों के मनोबल को प्रभावित किया। अब ध्यान TCS, HCL Technologies और अन्य बड़े IT नामों के तिमाही परिणामों पर है, जो निकट भविष्य के रुझान तय करेंगे।

कुल मिलाकर, बाजार में वैश्विक तनाव, तकनीकी कमजोरियां और निवेशकों की सतर्कता एक साथ काम कर रही हैं। इसका मतलब है कि निकट भविष्य में अस्थिरता बनी रहेगी और बढ़त सीमित रहेगी। जब तक व्यापार नीति, भू-राजनीति और परिणामों के बारे में स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक निवेशक सतर्क रहेंगे और बाजार में तेजी की संभावना कम है।


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