‘मोदी ने कॉल नहीं किया’: हॉवर्ड लटनिक ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील टूटने की वजह बताई

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भारत और अमेरिका के बीच अहम व्यापार समझौता आखिरी मोड़ पर टूट गया। अब इसकी वजह सामने आई है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने सीधे तौर पर कारण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कॉल नहीं किया। इसी वजह से वॉशिंगटन ने बाद में शर्तें बदल दीं।

लटनिक ने यह खुलासा 9 जनवरी को ऑल-इन पॉडकास्ट में किया। उन्होंने बातचीत की अंदरूनी कहानी साझा की। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच एक समझ बन चुकी थी। लेकिन समय पर राजनीतिक स्तर की पहल नहीं हुई। नतीजतन, मामला बिगड़ गया।

सबसे पहले, लटनिक ने अपनी भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वह समझौते की शर्तें तय करते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप हर डील को खुद अंतिम रूप देते हैं। इसलिए, उन्होंने भारतीय पक्ष से एक साफ मांग रखी। उन्होंने कहा कि मोदी को ट्रंप से बात करनी होगी।

लटनिक के मुताबिक, उन्होंने भारतीय वार्ताकारों से यह बात कई बार कही। उन्होंने कहा कि डील पूरी तरह तैयार थी। केवल एक कॉल बाकी था। लेकिन भारतीय पक्ष सहज महसूस नहीं कर रहा था। इसलिए, मोदी ने कॉल नहीं किया। लटनिक ने कहा कि यही देरी भारी पड़ी।

इसके बाद, भारतीय वार्ताकार दोबारा लौटे। वे समझौता पूरा करना चाहते थे। लेकिन तब तक हालात बदल चुके थे। लटनिक ने कहा कि अमेरिका अब पुराने नियमों पर राजी नहीं था। उन्होंने साफ किया कि समय ही निर्णायक था।

इसी बीच, लटनिक ने ट्रंप की रणनीति समझाई। उन्होंने इसे सीढ़ी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जो देश पहले आता है, उसे सबसे बेहतर सौदा मिलता है। हर अगला सौदा ऊंची सीढ़ी पर होता है। यानी शर्तें सख्त होती जाती हैं।

उन्होंने ब्रिटेन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने तेजी दिखाई। उसने तय समय में फैसला लिया। इसलिए, उसे सबसे अच्छा समझौता मिला। इसके बाद कई देश लाइन में आए। लेकिन उन्हें वही शर्तें नहीं मिलीं।

इसके बाद, लटनिक ने भारत की स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत को तीन शुक्रवार दिए। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर भारत का नाम लिया। इसलिए, कोई गोपनीयता नहीं थी। फिर भी, भारत समय पर कदम नहीं उठा सका।

उधर, दूसरे देश आगे बढ़ गए। इंडोनेशिया ने डील की। फिलीपींस ने समझौता किया। वियतनाम ने भी हाथ मिलाया। हर नई डील के साथ सीढ़ी ऊपर जाती गई। नतीजतन, भारत पीछे खिसकता चला गया।

फिर भारत ने दोबारा संपर्क किया। तब कई हफ्ते बीत चुके थे। लटनिक ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ट्रेन तीन हफ्ते पहले स्टेशन छोड़ चुकी थी। उन्होंने पूछा कि अब किस डील के लिए तैयारी है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब व्यापार तनाव बढ़ रहा है। एक दिन पहले सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने रूस प्रतिबंध बिल को मंजूरी दी है। यह बिल रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ का रास्ता खोलता है।

भारत पहले ही दबाव में है। अमेरिका भारत के कई उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुका है। इससे निर्यात प्रभावित हुआ है। निवेश पर भी असर पड़ा है। लटनिक के बयान इस दबाव को और उजागर करते हैं।

अंत में, लटनिक ने एक साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ बातचीत काफी नहीं होती। सही समय पर फैसला जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप की नीति में गति मायने रखती है।

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ होती है। उच्च स्तर की कूटनीति व्यापार की दिशा तय करती है। एक कॉल भी बड़े समझौते की किस्मत बदल सकता है।


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