मकल्ला हमले के बाद UAE ने लिया बड़ा फैसला, सऊदी से सेना हटाने की तैयारी

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संयुक्त अरब अमीरात ने इस हफ्ते कड़ा कदम उठाया। अबू धाबी ने घोषणा की कि वह सऊदी अरब से अपने सैनिक हटाएगा। यह फैसला सीधे तौर पर यमन के मकल्ला में हुए हमले से जुड़ता है। सऊदी लड़ाकू विमानों ने बंदरगाह शहर को निशाना बनाया। सऊदी अरब ने कहा कि उसने UAE से आए हथियारों को रोकने के लिए हमला किया।

हालाँकि, UAE ने आरोप खारिज किया। UAE ने कहा कि जहाज हथियार नहीं लाया। जहाज में सिर्फ गाड़ियाँ थीं। सैनिक उन गाड़ियों का इस्तेमाल करते थे। इसलिए अबू धाबी ने सफाई दी और विवाद को रोकने की कोशिश की।

इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने तर्क दिए। मंत्रालय ने कहा कि सेना हटाने से सुरक्षा बढ़ती है। साथ ही, आतंकवाद-रोधी अभियानों की दक्षता भी सुधरती है। इसलिए UAE अपनी योजना खुद तय करता है। वह तैनाती पर स्वतंत्र निर्णय लेता है।

फिर विदेश मंत्रालय सामने आया। मंत्रालय ने कहा कि UAE वैधता को मजबूत करता है। वह आतंकवाद से लड़ता है। वह यमन की संप्रभुता का सम्मान करता है। मंत्रालय ने दोहराया कि UAE किसी गुट को हथियार नहीं भेजता।

उधर, मकल्ला में तनाव बढ़ता गया। फुजैरा से जहाज वहाँ पहुँचा। तुरंत बाद सऊदी विमानों ने बम गिराए। सऊदी अधिकारियों ने दावा किया कि खेप दक्षिणी संक्रमण परिषद, यानी STC, के लिए गई। STC दक्षिण यमन में अलग पहचान मांगता है। वह 2017 से नियंत्रण बढ़ाता जा रहा है।

लेकिन UAE ने फिर जवाब दिया। उसने कहा कि खेप में सिर्फ वाहन थे। उसने कहा कि वह जल्द ही यमन से भी सेनाएँ घटाएगा। इस बीच, सऊदी-नेतृत्व गठबंधन ने और हवाई हमले किए। माहौल और बिगड़ा। लोग चिंतित हुए।

इसी दौरान पृष्ठभूमि में बड़ा बदलाव आया। STC ने हद्रमौत और महरा के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। उसने कई तेल स्थलों पर झंडा लगाया। दूसरी ओर यमनी सेना खड़ी रही। उसने हद्रमौत ट्राइबल अलायंस के साथ हाथ मिलाया। सऊदी अरब ने उस गठबंधन को समर्थन दिया।

इस तरह, दोनों खाड़ी देश अलग मोर्चों पर खड़े हो गए। सऊदी अरब एक गुट का समर्थन करता है। UAE दूसरे गुट के साथ समन्वय रखता है। फिर भी दोनों क्षेत्रीय स्थिरता की बात करते हैं।

फिर विश्लेषकों ने स्थिति को आँका। उन्होंने कहा कि STC अब मजबूत स्थिति हासिल कर रहा है। वह बातचीत में दबाव बना सकता है। वह दक्षिण के लिए आत्मनिर्णय की मांग दोहराता है। सऊदी अरब इस तेज़ बढ़त से परेशान दिखता है।

शुक्रवार को सऊदी विमानों ने फिर हद्रमौत को निशाना बनाया। विशेषज्ञों ने कहा कि यह चेतावनी थी। सऊदी अरब चाहता है कि अलगाववादी पीछे हटें। वहीं UAE जोखिम तौल रहा है। इसलिए वह तैनाती घटा रहा है और सैनिक घर बुला रहा है।

अंत में तस्वीर स्पष्ट दिखती है। दोनों देश साझेदारी की बात करते हैं। फिर भी दोनों अलग लक्ष्य साधते हैं। UAE संतुलन चाहता है। सऊदी अरब नियंत्रण चाहता है। और, यमन इस पूरे संघर्ष का केंद्र बना रहता है।


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