सोमवार की देर रात भांडुप दहला। एक बेस्ट बस ने रेलवे स्टेशन के बाहर कतार में खड़े लोगों को सीधा टक्कर मारी। तब सड़क पर अफरा-तफरी फैल गई। लोग भागे। परिवार रोते हुए मौके पर पहुँचे। पुलिस तुरंत पहुँची और जांच शुरू की।
घटना रात 10 बजकर पाँच मिनट पर हुई। ड्राइवर ने यू-टर्न लेने की कोशिश की। फिर उसने गलती से एक्सीलेरेटर दबा दिया। इसलिए बस आगे बढ़ी और उसने इंतज़ार कर रहे यात्रियों को कुचल दिया। चार लोग मरे। तीन महिलाएँ और एक पुरुष। वहीं, नौ लोग घायल पड़े। डॉक्टरों ने उन्हें नज़दीकी अस्पताल पहुँचाया।
पुलिस ने तुरंत ड्राइवर को हिरासत में लिया। अधिकारी हेमराज राजपूत ने टीम तैनात की। डॉक्टरों ने गंभीर मरीजों पर निगरानी शुरू की। परिवार लगातार जानकारी मांगते रहे। इधर, पुलिस ने गेट बंद किया और भीड़ को पीछे हटाया।
अब सवाल सड़क की व्यवस्था पर आया। स्टेशन के बाहर बेहद कम जगह बचती है। हॉकर्स ठेलों के साथ फुटपाथ घेर लेते हैं। इसलिए पैदल यात्री सड़क पर उतरते हैं। फिर वाहनों और भीड़ के बीच टकराव बढ़ता है। कई चश्मदीदों ने यही बात दोहराई। उन्होंने कहा, “यू-टर्न तंग जगह में फँस जाता है। बस के लिए सुरक्षित मोड़ नहीं बचता।”
स्थानीय दुकानदार तुरंत मदद में जुटे। एक मिठाई दुकानदार ने एंबुलेंस बुलवाई। फिर उसने घायलों को पानी दिया। उसने परिवारों को फोन लगाए। उसने पुलिस को पूरी तस्वीर समझाई। इस बीच, कई राहगीर भी सामने आए। किसी ने घायलों को उठाया। किसी ने ट्रैफिक रोका।
सरकार ने राहत का ऐलान किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीड़ित परिवारों के लिए सहायता घोषित की। उन्होंने दुख जताया और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
बेस्ट प्रशासन ने रूट और बस का विवरण दिया। यह नौ मीटर की एसी बस थी। यह 606 रिंग रोड रूट पर दौड़ रही थी। कंपनी ने संचालन मॉडल समझाया और ड्राइवर की ड्यूटी रिकॉर्ड की जाँच शुरू की।
हालांकि, पड़ोसियों ने एक और चिंता जताई। उन्होंने कहा, “रात को भीड़ और बढ़ जाती है। ट्रेनें लगातार आती-जाती हैं। तब बसें तंग मोड़ में फिसल जाती हैं।” फार्मासिस्ट सैमीनी मुदलियार ने बताया कि चालक अक्सर स्टेशन के बाहर यू-टर्न लेते समय संघर्ष करते हैं।
इस घटना ने पिछली दिसंबर की याद ताज़ा कर दी। तब एक और बेस्ट बस ने कुरला में यात्रियों को टक्कर मारी। उस हादसे में कई लोग मरे। कई घायल हुए। इसलिए लोगों में डर फिर लौट आया।
अब जांच कई सवालों पर टिकती है। सड़क इतनी संकरी क्यों रही? हॉकर्स के लिए वैकल्पिक ज़ोन क्यों नहीं बना? बसों के लिए अलग मोड़ क्यों नहीं दिखा? और, ड्राइवर को बेहतर प्रशिक्षण कब मिलेगा?
फिर भी, रात का दृश्य सच बताता है। भीड़ बढ़ती रही। बस ने नियंत्रण खो दिया। और चार परिवार टूट गए। शहर ने एक और सबक देखा। अब जिम्मेदारी तय करनी होगी। नहीं तो अगली रात फिर वही कहानी लौट आएगी।