घने कोहरे ने दिल्ली की उड़ानों को फिर रोका, यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं
दिल्ली में मंगलवार सुबह फिर घना कोहरा छा गया। एयरलाइंस तुरंत सतर्क हो गईं। पायलट रनवे पर धीमे उतरे। वहीं, यात्रियों ने लंबी कतारें देखीं। इस तरह, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हालात तेजी से बिगड़ गए।
सुबह बढ़ी धुंध ने दृश्यता घटा दी। मौसम विभाग ने 350 मीटर की दृश्यता दर्ज की। फिर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने रनवे पर सख्त नियम लागू किए। परिणाम साफ दिखा। एयरलाइंस ने उड़ानें रोक दीं। क्रू ने यात्रियों को समझाया। जबकि, लोग जानकारी के इंतज़ार में रहे।
धीरे-धीरे देरी बढ़ती गई। एयरलाइंस ने 118 उड़ानें रद्द कीं। फिर 200 से ज्यादा उड़ानें समय से पीछे खिसक गईं। कुछ विमान दूसरे शहरों की ओर मुड़ गए। बच्चे रोए। बुजुर्ग थके। और यात्री अपने फोन पर अपडेट देखते रहे।
इधर, मौसम ने रेल पटरियों को भी प्रभावित किया। कई ट्रेनें लेट हुईं। स्टेशन पर भीड़ बढ़ी। यात्री प्लेटफॉर्म पर चक्कर लगाते रहे। इस तरह, शहर दूसरे दिन भी यात्रा संकट से जूझता रहा।
अब हवाईअड्डों की बात करें। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने त्वरित बैठक बुलाई। अधिकारियों ने स्थिति का आकलन किया। फिर उन्होंने सलाह जारी की। उन्होंने यात्रियों से कहा—एयरलाइंस से लगातार संपर्क रखें। साथ-साथ, वे यात्रियों से अधिक समय लेकर एयरपोर्ट पहुंचने को बोले। इसके अलावा, टीमों ने टर्मिनलों में मदद डेस्क लगाए। कर्मचारी बूढ़ों और बच्चों की सहायता करते रहे।
एयरलाइंस ने भी तैयारी कड़ी की। इंडिगो ने देर रात सलाह जारी की। एयरलाइन ने दिल्ली के साथ अमृतसर, चंडीगढ़, जम्मू, कोलकाता, रांची, गुवाहाटी और हिंडन में रुकावट की चेतावनी दी। ऑपरेशन टीम ने रात भर मौसम पर नज़र रखी। वे हर मिनट रिपोर्ट अपडेट करते रहे। फिर भी, कोहरा और गाढ़ा होता गया।
सोमवार को भी हालात कठिन रहे। तब एयरलाइंस ने 120 से ज्यादा उड़ानें रद्द कीं। इंडिगो ने अपने नेटवर्क में कई उड़ानें रोकीं। मंगलवार को वही कहानी फिर लौट आई। पायलट इंतज़ार करते रहे। कंट्रोलर स्लॉट बदलते रहे। लेकिन बैकलॉग लंबा होता गया।
अब पृष्ठभूमि समझिए। सर्दियों में दिल्ली बार-बार कोहरे का सामना करती है। उत्तरी हवा शहर की नमी से मिलती है। फिर मोटी परत रनवे पर बैठ जाती है। इस समय पायलट सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं। आधुनिक तकनीक मदद करती है। फिर भी, घना कोहरा यातायात को धीमा कर देता है।
एयरलाइंस ने यात्रियों से लगातार अपील की। वे लोगों से बोले—फ्लाइट स्टेटस ऑनलाइन जांचते रहें। वे लोगों से जल्दी पहुंचने को कहने लगे। साथ-ही-साथ, उन्होंने टिकट बदलने के विकल्प दिए। कुछ यात्रियों ने योजनाएँ बदलीं। कुछ ने यात्राएँ स्थगित कीं।
इस बीच, शहर ने धैर्य दिखाया। परिवार एक-दूसरे को अपडेट देते रहे। एयरपोर्ट कर्मचारी शांति से भीड़ संभालते रहे। डॉक्टर ऑन-कॉल रहे। सुरक्षा टीम गश्त करती रही। हर कोई एक ही लक्ष्य पर टिका रहा—यात्रियों को सुरक्षित रखना।
आगे क्या? मौसम विशेषज्ञ धीरे-धीरे सुधार की बात करते हैं। हालांकि, वे तुरंत राहत का वादा नहीं करते। एयरलाइंस सतर्क रहती हैं। अधिकारी नई सलाह तैयार करते हैं। और यात्री अगली सूचना का इंतज़ार करते हैं।
दिल्ली फिर सर्दी के इस परीक्षण से गुजरती है। कोहरा बढ़ता है। व्यवस्था तनाव झेलती है। और अंत में, शहर नई सुबह का इंतज़ार करता है।
