दक्षिण अफ्रीका हार के बाद कोचिंग पर बहस तेज, BCCI ने लक्सरमान का विकल्प देखा, लेकिन उन्होंने मना किया

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BCCI फिर चर्चा में आता है। कारण साफ है। भारतीय टेस्ट टीम लगातार दबाव महसूस करती है। फिर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 0–2 की हार सामने आती है। इसके साथ ही सवाल बढ़ते हैं। आलोचक सीधे गौतम गंभीर को घेरते हैं। वे रिकॉर्ड खोलते हैं। वे कहते हैं कि घर में यह दूसरा क्लीन स्वीप रहा। इसलिए बहस तेज होती है।

गंभीर जवाब देते हैं। वे शांत रहते हैं, लेकिन स्पष्ट बोलते हैं। वे कहते हैं कि उन्होंने चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जिताया। वे सफेद गेंद के प्रदर्शन पर भरोसा जताते हैं। दूसरी ओर, BCCI स्थिति को देखता है। बोर्ड सार्वजनिक बयान नहीं देता। हालांकि, अंदर चर्चा चलती रहती है। वरिष्ठ अधिकारी विकल्पों पर विचार करते हैं।

इसी दौरान खबर आती है। BCCI वीवीएस लक्ष्मण से बात करता है। बोर्ड उनसे टेस्ट टीम की कमान संभालने में रुचि पूछता है। यह पहली कोशिश नहीं थी। पहले भी BCCI ऐसा करता है। तब भी लक्ष्मण सोचते हैं। फिर वे कोचिंग से दूरी रखते हैं। इस बार भी वे साफ जवाब देते हैं। वे कहते हैं कि उन्हें बेंगलुरु में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का काम पसंद है। वे वहीं ध्यान लगाना चाहते हैं।

इस फैसले के बाद भी कहानी रुकती नहीं। बोर्ड आगे की योजना बनाता है। वह 2027 तक गंभीर के कॉन्ट्रैक्ट को देखता है। फिर भी बोर्ड खुला रुख रखता है। T20 विश्व कप सामने आता है। नौ महत्वपूर्ण टेस्ट मैच भी कैलेंडर में खड़े रहते हैं। भारत विश्व टेस्ट चैंपियनशिप तालिका में नीचे खिसकता है। इससे दबाव और बढ़ता है।

कुछ लोग कहते हैं कि गंभीर के पास अभी मजबूत समर्थन मौजूद है। वे तर्क देते हैं कि अगर भारत T20 विश्व कप जीतता है या फाइनल तक पहुंचता है, तो गंभीर अपनी भूमिका जारी रखते हैं। लेकिन दूसरी तरफ एक सवाल भी उठता है। क्या वही नाम टेस्ट क्रिकेट के लिए सही साबित होता है? BCCI इस दुविधा को समझता है। इसलिए वह जल्दबाजी से बचता है।

इस बीच, चयन से लेकर रणनीति तक कई बैठकें होती हैं। कोचिंग मॉडल पर भी चर्चा बढ़ती है। कुछ सदस्य स्प्लिट-कोचिंग का सुझाव देते हैं। वे सीमित ओवर और टेस्ट के लिए अलग दृष्टिकोण चाहते हैं। दूसरी ओर, कुछ लोग स्थिरता की बात करते हैं। वे कहते हैं कि टीम को एक ही दिशा में चलना चाहिए।

लक्ष्मण अपनी चुप्पी बनाए रखते हैं। वे मीडिया से दूरी रखते हैं। फिर भी उनका फैसला साफ संदेश देता है। वे जिम्मेदारी चुनते हैं, लेकिन सावधानी से। वे कोचिंग की जगह संरचना मजबूत करते हैं।

अब आगे क्या होता है? BCCI प्रदर्शन को देखता है। खिलाड़ी भी आगामी सीरीज की तैयारी करते हैं। गंभीर अपनी रणनीति पर काम करते हैं। वहीं, बहस जारी रहती है। भारतीय क्रिकेट इस मोड़ पर नए जवाब खोजता है।


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