दिल्ली खतरनाक प्रदूषण झेलती है। वाहन इस संकट को और बढ़ाते हैं। इसलिए सरकार अब परिवहन सेक्टर में बड़ा बदलाव शुरू करती है। लक्ष्य साफ है। शहर को स्वच्छ बनाना है। साथ-साथ सफर आसान बनाना है।
सबसे पहले सरकार स्थिति का आकलन करती है। एनसीआर में करोड़ों वाहन चलते हैं। फिर भी अधिकतर वाहन दिल्ली की सड़कों पर दौड़ते हैं। यह असंतुलन ट्रैफिक बढ़ाता है। आगे यह हवा को जहरीला बनाता है। इसके अलावा, शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों की कमी बनी रहती है। इसलिए नेतृत्व नई दिशा तय करता है।
अब सरकार बजट बढ़ाती है। परिवहन विभाग को बड़ा आवंटन मिलता है। इससे प्रोजेक्ट तेज होते हैं। मेट्रो नेटवर्क इसमें प्रमुख भूमिका निभाता है। सरकार फेज-IV के तीन नए कॉरिडोर मंजूर करती है। ये कॉरिडोर लाजपत नगर, साकेत, इंदरलोक, इन्द्रप्रस्थ, ऋथाला और कुंडली को जोड़ते हैं। साथ-साथ तीन प्राथमिक कॉरिडोरों पर काम आगे बढ़ता है। ये लाइनें 2026 तक शहर के कई हिस्सों को जोड़ती हैं। इसी दौरान दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल भी गति पकड़ती है। यात्री तेज और सुविधाजनक सफर की उम्मीद करते हैं।
अब फोकस बसों पर आता है। सरकार दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन का ढांचा सुधारती है। DTC संचालन मजबूत करता है। फिर यह क्लस्टर बस सिस्टम को अपने नियंत्रण में लेता है। उद्देश्य स्पष्ट है। जवाबदेही बढ़ानी है। दक्षता सुधारनी है।
इसके साथ विभाग रूट योजना दोबारा तैयार करता है। अधिकारी यात्रा पैटर्न का अध्ययन करते हैं। फिर वे ओवरलैप घटाते हैं। वे अनदेखे इलाकों तक बसें पहुंचाते हैं। वे मेट्रो और RRTS के साथ बेहतर लिंक बनाते हैं। परिणामस्वरूप यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी मिलती है। समय बचता है।
अब बस बेड़ा भी बदलता है। पुरानी CNG बसें धीरे-धीरे बाहर जाती हैं। उनकी जगह इलेक्ट्रिक बसें आती हैं। परिवहन मंत्री पंकज सिंह लक्ष्य तय करते हैं। वे 7,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें लाने की घोषणा करते हैं। वे भरोसेमंद संचालन का वादा करते हैं। हालांकि, अदालत के पुराने आदेश अभी ऊंची संख्या मांगते हैं। इसलिए अंतर बना रहता है।
इसके बाद सरकार नई EV नीति तैयार करती है। मंत्रियों का समूह इसका मसौदा लिखता है। नीति में खरीद सब्सिडी शामिल होती है। नीति चार्जिंग नेटवर्क का ढांचा तय करती है। साथ-साथ नीति बैटरियों के रीसाइक्लिंग सिस्टम भी बनाती है। उद्देश्य स्पष्ट रहता है। स्वच्छ वाहन अपनाने को बढ़ावा देना है।
इसी बीच नेतृत्व पारंपरिक ईंधन वाहनों पर सख्त रुख दिखाता है। बयान साफ संदेश देता है। पेट्रोल, डीज़ल और CNG गाड़ियों पर रुकावट बढ़ेगी। सरकार लोगों को EV की ओर मोड़ना चाहती है।
फिर चर्चा ई-रिक्शा पर पहुंचती है। शहर में लाखों लोग इन्हीं से आखिरी मील तय करते हैं। यह सस्ता विकल्प देता है। लेकिन अनियंत्रित संचालन जाम पैदा करता है। इसलिए सरकार नए नियम लाती है। ये नियम रूट, स्टॉप और ऑपरेशन तय करते हैं।
अभी चुनौती बड़ी है। दिल्ली को साफ हवा चाहिए। लोगों को तेज और सुरक्षित यात्रा चाहिए। सरकार निवेश बढ़ाती है। योजनाएं आगे बढ़ाती है। लेकिन सफलता के लिए लगातार निगरानी जरूरी रहेगी। पारदर्शी काम ही भरोसा बढ़ाएगा। यदि सभी एजेंसियां तालमेल रखें, तो 2026 दिल्ली की यात्रा कहानी बदल सकता है।