“तोड़फोड़ पर सियासत गरम: कांग्रेस ने सिद्धारमैया को नरमी अपनाने की सलाह दी”
बेंगलुरु के बाहरी इलाके में तोड़फोड़ शुरू हुई। लोगों में गुस्सा उठा। फिर राजनीतिक हलचल बढ़ी। कांग्रेस के भीतर असहमति दिखी। वरिष्ठ नेता तुरंत सक्रिय हुए। वे नुकसान कम करना चाहते थे। उधर, प्रदर्शन तेज हुए। विपक्ष ने सवाल दागे। राज्य सरकार दबाव महसूस करने लगी।
सबसे पहले के.सी. वेणुगोपाल ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से बात की। फिर उन्होंने उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से बात की। उन्होंने संवेदनशील रवैये पर जोर दिया। उन्होंने कहा, मानव कीमत सबसे ऊपर रहे। वे चाहते थे कि सरकार राहत को प्राथमिकता दे। वे चाहते थे कि संवाद खुला रहे। इसके साथ ही पार्टी नेतृत्व ने चिंता जताई। नेतृत्व ने अधिक सावधानी की जरूरत दोहराई।
इस बीच, जमीन पर हालात गर्म रहे। एसडीपीआई और स्थानीय लोग जुटे। उन्होंने मार्च निकाला। उन्होंने छत और राशन की मांग रखी। उन्होंने कहा, सरकार गरीब परिवारों को उजाड़ रही है। वे वैकल्पिक व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे। उनके नेताओं ने पुराने वादों की याद दिलाई। उन्होंने कहा, सत्ता बदलती रहती है। लेकिन विस्थापन का दर्द वहीं रहता है। इधर, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की टिप्पणी ने बहस बढ़ाई। मुद्दे को राष्ट्रीय गूंज मिली।
अब सरकार ने सफाई दी। सिद्धारमैया ने पृष्ठभूमि समझाई। उन्होंने कहा, कोगिलु बदावने का इलाका खतरा पैदा करता है। वहां कूड़े का ढेर जमा रहता है। वहां असुरक्षित बस्तियां बन गई थीं। उन्होंने कहा, प्रशासन ने कई नोटिस जारी किए। परिवार फिर भी रुके रहे। इसलिए सरकार ने कड़ी कार्रवाई चुनी। उन्होंने बीबीएमपी को निर्देश दिए। प्रशासन ने अस्थायी शिविर, भोजन और आवश्यक सुविधाएं तैयार कीं। उन्होंने कहा, कई परिवार प्रवासी मजदूरों से आते हैं। फिर भी सरकार पुनर्वास देगी। सरकार मानवीय दृष्टि अपनाएगी।
उधर, भाजपा ने मोर्चा खोला। आर. अशोक ने वेणुगोपाल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, पार्टी नेतृत्व प्रशासन में दखल देता है। उन्होंने इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताया। उन्होंने पूछा, फैसले बेंगलुरु ले या दिल्ली। उन्होंने आरोप लगाया, राजनीति दावेदारी चला रही है। उन्होंने कहा, कानून और प्रक्रिया समाधान दे सकते हैं। वे चाहते हैं कि जवाबदेही संस्थागत रहे।
फिर शिवकुमार ने पलटवार किया। उन्होंने विजयन की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, बाहरी नेता पहले तथ्य देखें। उन्होंने दावा किया, सरकार सार्वजनिक जमीन बचा रही है। सरकार किसी समुदाय को निशाना नहीं बना रही। उन्होंने भूमि माफिया की साजिश का जिक्र किया। उन्होंने कहा, कुछ लोग कूड़ाघर को झुग्गी में बदलना चाहते थे। उन्होंने बताया, प्रशासन ने बार-बार स्थानांतरण के विकल्प दिए। उन्होंने “बुलडोजर न्याय” के आरोप को खारिज किया। उन्होंने कहा, सरकार व्यवस्था मजबूत करती है, डर नहीं फैलाती।
हालांकि, चिंता बनी रही। कई परिवार अनिश्चितता झेलते रहे। बच्चे स्कूल से दूर रहे। महिलाएं बुनियादी सुविधाओं के लिए कतार में खड़ी रहीं। इस बीच, राजनेता बयान देते रहे। संगठनों ने धरना जारी रखा।
अब सबसे बड़ा सवाल सामने खड़ा है। सरकार विकास, कानून और करुणा का संतुलन कैसे बनाए। कांग्रेस सहानुभूति की बात करती है। विपक्ष पारदर्शिता की मांग करता है। प्रभावित लोग सुरक्षित घर चाहते हैं। आगे का रास्ता सरकार तय करेगी। सही कदम विश्वास पैदा करेगा। गलत कदम नया संकट खड़ा करेगा। इसलिए नेतृत्व को सुनना पड़ेगा। और प्रशासन को संवेदनशील ढंग से काम करना पड़ेगा।
