तमिलनाडु की राजनीति तेज़ हो रही है। इसी बीच अभिनेता और भाजपा नेता आर. सरथकुमार ने साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सच्चा नेता पहले लोगों की बात सुनता है। फिर वह काम करता है। इसलिए उन्होंने कहा कि लोग अभिनेता विजय को तभी परखें, जब वह चुनाव मैदान में उतरें। और जब वह अपनी विचारधारा स्पष्ट रखें।
सरथकुमार ने यह बात तूतीकोरिन एयरपोर्ट पर कही। वह पुलियानकुडी में क्रिसमस कार्यक्रम के लिए रवाना हो रहे थे। उन्होंने विजय के राजनीतिक कदम पर बात की। उन्होंने कहा कि चुनाव असली परीक्षा लेते हैं। चुनाव नीयत दिखाते हैं। और चुनाव नेतृत्व की क्षमता तय करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जना नायकन शायद विजय की आखिरी फिल्म बन जाए। इससे प्रशंसक निराश महसूस करते हैं। लेकिन राजनीति पूरा समय मांगती है। इसलिए निर्णय कठिन होते हैं।
अब बात भाजपा की रणनीति की। सरथकुमार ने कहा कि पार्टी पहले राज्य नेतृत्व से चर्चा करेगी। फिर सीटों पर फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया स्पष्ट रहेगी। टीम पहले स्थिति समझेगी। उसके बाद निर्णय आगे बढ़ेगा। साथ ही उन्होंने अपने चुनाव लड़ने पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उनके साथ काम करने वाले साथियों को मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समर्पित कार्यकर्ता बेहतर प्रतिनिधि बनते हैं।
इसके बाद उन्होंने डीएमके सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “द्रविड़ मॉडल” सच्चाई को मोड़ देता है। उन्होंने उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सरकार बहु-विशेषता अस्पताल को मातृत्व अस्पताल बता देती है। उन्होंने कहा कि लोग असलियत पहचानते हैं। वे चुपचाप देखते हैं। फिर वे मतदान में फैसला करते हैं।
फिर सरथकुमार ने कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में हत्याएँ बढ़ रही हैं। उन्होंने कारण जानने की मांग की। उन्होंने पूछा कि खुफिया एजेंसियाँ क्या रोकथाम की योजना बना रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस बल सीमित है। संख्या करीब एक लाख के आसपास है। इसलिए हर मोर्चे पर नियंत्रण मुश्किल बनता है। उन्होंने कहा कि नशे की लत अपराध बढ़ा रही है। खासकर यौन अपराध। उन्होंने सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई। उन्होंने बेहतर निगरानी पर ज़ोर दिया।
इसी दौरान पृष्ठभूमि भी बदल रही है। विजय राजनीति में पूरी तरह उतरने पर विचार कर रहे हैं। युवा उन्हें पसंद करते हैं। उनका प्रभाव सिनेमा से आगे जाता है। लेकिन राजनीति अलग दुनिया है। यहाँ संगठन चाहिए। नीतियाँ चाहिए। और स्पष्ट रुख चाहिए। इसलिए सरथकुमार चुनाव को निर्णायक कसौटी मानते हैं।
उधर भाजपा राज्य में नेटवर्क बढ़ा रही है। पार्टी गठबंधन विकल्प देख रही है। वह बूथ स्तर पर काम तेज कर रही है। सरथकुमार के बयान उसी रणनीति का संकेत देते हैं। वे संगठन के भीतर अनुशासन पर ज़ोर देते हैं। वे विपक्ष पर प्रहार करते हैं। और वे नए नेताओं के लिए जगह बनाने की बात करते हैं।
आखिर में संदेश सरल रहा। नेतृत्व सुनने से मजबूत होता है। विश्वसनीयता चुनाव से बनती है। और राजनीति में स्पष्टता विश्वास पैदा करती है। अब तमिलनाडु इंतज़ार कर रहा है। विजय अगला कदम तय करेंगे। भाजपा अपनी योजना आगे बढ़ाएगी। और मतदाता आने वाले समय में फैसला करेंगे।