ओडिशा में नई शुरुआत — अनु गर्ग 1 जनवरी से पहली महिला मुख्य सचिव के तौर पर कमान संभालेंगी

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ओडिशा बदलाव की ओर बढ़ता है। राज्य सरकार अनु गर्ग को मुख्य सचिव बनाती है। वह 1 जनवरी से जिम्मेदारी लेती हैं। वहीं, मनोज आहूजा 31 दिसंबर को रिटायर होते हैं। इसलिए प्रशासन सुचारु बदलाव की तैयारी करता है।

अनु गर्ग अभी विकास आयुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में काम करती हैं। अब वह शीर्ष प्रशासनिक पद पर पहुँचती हैं। सरकार साफ संकेत देती है। वह निरंतरता चाहती है। साथ ही वह मजबूत शासन का लक्ष्य तय करती है।

उनका करियर लंबा और सुदृढ़ दिखता है। वह 1991 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। तीन दशक से अधिक का अनुभव रखती हैं। जन्म 31 मार्च 1969 को हुआ। उनके पास सेवा के तीन से अधिक वर्ष बाकी हैं। इसलिए वह दीर्घकालिक सुधार आगे बढ़ा सकती हैं।

फरवरी 2023 में वह राज्य की पहली महिला विकास आयुक्त बनीं। फिर वह स्वाभिमान अंचल पहुँचीं। यह क्षेत्र माओवादी प्रभाव झेलता है। इसके बावजूद वह वहाँ रातभर रहीं। उन्होंने बदापड़ा गाँव में लोगों से बातचीत की। टीम के साथ जमीनी हालात समझे। इस दौरान उन्होंने भरोसा बढ़ाया और अधिकारियों को सक्रिय किया।

उनकी कार्यशैली प्रतिबद्धता दिखाती है। वह महिला एवं बाल विकास विभाग में काम करती रहीं। फिर श्रम और ईएसआई में सुधार लाती रहीं। बाद में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण में कार्यक्रमों को गति देती रहीं। हर पद पर वह लक्ष्य तय करती हैं। फिर वह टीम के साथ परिणाम हासिल करती हैं।

इसके पहले वह केंद्र में भी अहम भूमिकाएँ निभाती रहीं। 2012 से 2015 तक वह प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव रहीं। वहाँ वह समन्वय बढ़ाती रहीं। वह संवेदनशील फाइलें संभालती रहीं। इसके बाद वह वस्त्र मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय में भी काम करती रहीं। फिर 2017 में वह ओडिशा लौटती हैं और राज्य प्रशासन में नई ऊर्जा लाती हैं।

उनकी प्रशासनिक यात्रा झारसुगुड़ा से शुरू होती है। वह सब-कलेक्टर बनकर काम करती हैं। वह जमीन विवाद सुलझाती हैं। लोगों से सीधे मिलती हैं। फिर वह बरगढ़ और संबलपुर की कलेक्टर बनती हैं। वहाँ वह योजनाओं की निगरानी करती हैं। परियोजनाओं को समय पर आगे बढ़ाती हैं।

इस बीच, ओडिशा तेज रफ्तार से बदलाव चाहता है। राज्य बुनियादी ढाँचे में निवेश बढ़ाता है। वह कल्याण योजनाएँ विस्तार देता है। साथ ही वह डिजिटल सेवाएँ मजबूत करता है। इसलिए एक स्थिर और अनुभवी नेतृत्व अहम बनता है। अनु गर्ग यही संतुलन लाती हैं।

राज्य कई चुनौतियों का सामना करता है। मौसम की आपदाएँ संसाधनों पर दबाव डालती हैं। रोजगार के नए पैटर्न प्रशासन को नई जिम्मेदारी देते हैं। तकनीक निर्णयों को तेज बनाती है। फिर भी मजबूत टीमवर्क जोखिम कम करता है। अनु गर्ग डेटा-आधारित फैसलों पर जोर देती हैं। वह फील्ड विज़िट बढ़ाती हैं।

राजनीतिक नेतृत्व इस नियुक्ति का समर्थन करता है। अफसरों में भरोसा बढ़ता है। नागरिक तेज समाधान की अपेक्षा रखते हैं। उद्योग जगत सुगम प्रक्रियाओं की मांग करता है। इसलिए मुख्य सचिव की भूमिका और भी अहम बन जाती है।

यह नियुक्ति केवल प्रशासनिक कदम नहीं दिखती। यह एक संकेत बनती है। प्रतिभा आगे बढ़ती है। योग्यता मार्ग तय करती है। और महिलाएँ शीर्ष जिम्मेदारियाँ संभालती हैं।

अब अगला अध्याय शुरू होता है। बजट पास आते हैं। योजनाएँ फैलती हैं। लक्ष्य सख्त होते हैं। फिर भी अनु गर्ग शांत रहती हैं। वह योजना बनाती हैं। वह क्रियान्वयन पर ध्यान देती हैं। और वह परिणाम तय करती हैं।

ओडिशा आगे देखता है। प्रशासन दिशा तय करता है। सुधार जारी रहता है। शामिलियत बढ़ती है। और केंद्र में खड़ी रहती हैं—अनु गर्ग—अनुभव, दृढ़ता और संकल्प के साथ।


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