राहुल गांधी का ‘संस्थानों पर हमला’ दावा, भाजपा का ‘प्रोपेगेंडा’ पलटवार
khabarworld 23/12/2025 0
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर देश की राजनीति में हलचल पैदा की है। इस बार मंच विदेश का रहा। जर्मनी के बर्लिन में हर्टी स्कूल में दिए भाषण में राहुल गांधी ने भारत की संस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश की संस्थागत व्यवस्था पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ भाजपा इन संस्थाओं का राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।
राहुल गांधी ने सबसे पहले चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत की चुनावी मशीनरी में समस्या है। इसके बाद उन्होंने जांच एजेंसियों का जिक्र किया। उन्होंने खुफिया एजेंसियों, सीबीआई और ईडी का नाम लिया। राहुल गांधी के अनुसार, ये एजेंसियां अब निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा रहीं। उन्होंने कहा कि इनका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए हो रहा है।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए अपनी बात रखी। राहुल गांधी ने कहा कि ईडी और सीबीआई के मामले भाजपा नेताओं के खिलाफ लगभग शून्य हैं। इसके उलट, उन्होंने दावा किया कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ बड़ी संख्या में मामले दर्ज हैं। इसी कारण, उन्होंने कहा कि देश में डर का माहौल बन रहा है और लोकतंत्र कमजोर हो रहा है।
इसके बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस और भाजपा के नजरिए की तुलना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश की संस्थाओं के निर्माण में भूमिका निभाई। इसलिए कांग्रेस ने कभी संस्थाओं को अपनी निजी संपत्ति नहीं माना। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संस्थाओं को अपनी जागीर समझती है। उनके अनुसार, भाजपा इन्हें सत्ता मजबूत करने के औजार के रूप में देखती है।
राजनीतिक फंडिंग पर भी राहुल गांधी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा और विपक्ष के संसाधनों में भारी अंतर है। उन्होंने इसे लगभग 30:1 का अनुपात बताया। राहुल गांधी के मुताबिक, यह असमानता लोकतांत्रिक मुकाबले को प्रभावित करती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को सिर्फ शिकायत नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय, उसे ठोस रणनीति बनानी होगी।
फिर राहुल गांधी ने विपक्ष की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि विपक्ष को संस्थागत दबाव का जवाब देने के नए तरीके खोजने होंगे। उन्होंने साफ किया कि यह लड़ाई केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह देश के भविष्य की दिशा तय करने की लड़ाई है।
INDIA गठबंधन पर सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने उसकी वैचारिक एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन को केवल चुनावी मजबूरी के रूप में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि INDIA गठबंधन की पार्टियां आरएसएस की मूल विचारधारा से सहमत नहीं हैं। इसी बिंदु पर, उन्होंने कहा, सभी दल एकजुट हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि रणनीतिक स्तर पर मतभेद होते रहेंगे।
राहुल गांधी ने संसद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संसद के भीतर विपक्ष अक्सर एकजुट दिखता है। उन्होंने बताया कि विपक्ष सरकार के उन कानूनों का विरोध करता है, जिनसे वह सहमत नहीं है। उनके अनुसार, यह संघर्ष अब एक वैकल्पिक भारत की सोच को लेकर है।
राहुल गांधी के विदेश में दिए बयान पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया। भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद सत्र के दौरान राहुल गांधी जर्मनी में भारत के खिलाफ बयान दे रहे हैं। नड्डा ने यह भी कहा कि ऐसे समय में बयान दिए जा रहे हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिल रहा है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी फिर से “डिफेम इंडिया” अभियान पर निकले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेश जाकर झूठ फैलाते हैं। पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी खुद को नेता प्रतिपक्ष नहीं, बल्कि “लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा” की तरह पेश कर रहे हैं। उन्होंने चीन की तारीफ और भारत की आलोचना को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा।
इस तरह, राहुल गांधी के बर्लिन भाषण ने सियासी टकराव को और तेज कर दिया है। एक तरफ कांग्रेस इसे लोकतंत्र की लड़ाई बता रही है। दूसरी तरफ भाजपा इसे देश की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कह रही है। यह बहस अब देश की सीमाओं से बाहर भी गूंज रही है।
