लाल किला ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: NIA ने उमर-उन-नबी के करीबी सहयोगी को दबोचा, अब तक 9 गिरफ्तार
लाल किला ब्लास्ट मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार को एक अहम आरोपी को गिरफ्तार किया। यह आरोपी उमर-उन-नबी का करीबी सहयोगी है। उमर-उन-नबी ही वह शख्स था, जिसने 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास विस्फोटक से भरी कार चलाई थी।
NIA ने आरोपी की पहचान यासिर अहमद डार के रूप में की। वह जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले का रहने वाला है। एजेंसी ने उसे दिल्ली से पकड़ा। इसके बाद NIA ने उस पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इस गिरफ्तारी के साथ ही केस में पकड़े गए आरोपियों की संख्या नौ हो गई है।
जांच के दौरान NIA को डार की भूमिका बेहद अहम लगी। एजेंसी के अनुसार, डार इस साजिश का सक्रिय हिस्सा था। उसने हमले की तैयारी में सीधी भागीदारी निभाई। इस कार बम धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी। कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
NIA के एक प्रवक्ता ने बताया कि डार ने आत्मघाती हमले के लिए शपथ भी ली थी। जांच एजेंसी मानती है कि यह तथ्य उसकी गहरी कट्टरता को दर्शाता है। इससे यह भी साफ होता है कि हमले का मकसद ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना था।
इसके अलावा, NIA को डार के संपर्कों के बारे में भी अहम जानकारी मिली है। जांच में सामने आया कि वह लगातार दूसरे आरोपियों के संपर्क में था। इनमें उमर-उन-नबी भी शामिल था, जो धमाके के दौरान मारा गया। इसके साथ ही डार का संपर्क मुफ्ती इरफान से भी था, जिसे एजेंसी इस साजिश का प्रमुख साजिशकर्ता मानती है।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपियों ने अलग-अलग स्तरों पर जिम्मेदारियां बांटी थीं। इसका मकसद जांच एजेंसियों की नजर से बचना था। हालांकि, तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं ने इस नेटवर्क को बेनकाब कर दिया।
इससे पहले NIA ने इस महीने की शुरुआत में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। टीमों ने जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में कई ठिकानों पर तलाशी ली। इन छापों के दौरान एजेंसी ने डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की। जांच अधिकारी अब इन सामग्रियों का विश्लेषण कर रहे हैं।
NIA ने इससे पहले हरियाणा के फरीदाबाद में भी कई ठिकानों पर कार्रवाई की थी। एजेंसी ने अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर में भी तलाशी ली थी। इस विश्वविद्यालय से जुड़े डॉ. मुजम्मिल शकील गनई और डॉ. शाहीन सईद को NIA पहले ही मुख्य आरोपी घोषित कर चुकी है। एजेंसी को शक है कि पढ़े-लिखे पेशेवरों ने इस आतंकी साजिश को वैचारिक और तकनीकी समर्थन दिया।
लाल किला ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर दिया था। लाल किला राष्ट्रीय गौरव और संप्रभुता का प्रतीक है। ऐसे संवेदनशील इलाके के पास धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया था। इसके बाद दिल्ली समेत कई शहरों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई।
अब तक की गिरफ्तारी से जांच एजेंसियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, NIA का मानना है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी विदेशी संपर्कों और फंडिंग के एंगल से भी पड़ताल कर रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। फिलहाल, यासिर अहमद डार की गिरफ्तारी को इस केस में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
