उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश उबाल पर: मीडिया दफ्तर जले, शहरों में तनाव

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बांग्लादेश एक बार फिर गंभीर अशांति के दौर में प्रवेश कर चुका है। युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे हैं। गुरुवार देर रात हादी के निधन की खबर सामने आते ही हालात तेजी से बिगड़े। यह घटनाक्रम फरवरी 2026 के आम चुनाव से पहले देश के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

उस्मान हादी पर पिछले हफ्ते जानलेवा हमला हुआ था। वह ढाका में अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहे थे। तभी नकाबपोश हमलावरों ने उन पर गोलियां चलाईं। एक हमलावर चलती मोटरसाइकिल पर पीछे बैठा था। हादी उस समय रिक्शा से यात्रा कर रहे थे। गोली सिर में लगी और वह वहीं गिर पड़े।

समर्थकों ने उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। हालत नाजुक बनी रही। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें सिंगापुर एयरलिफ्ट किया। वह छह दिन तक लाइफ सपोर्ट पर रहे। गुरुवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।

हादी बांग्लादेश के जुलाई 2024 के जनउभार का प्रमुख चेहरा रहे। इसी आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से बाहर किया था। हसीना बाद में भारत चली गईं। हादी ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता थे। यह मंच उसी जनआंदोलन के बाद बना। 32 वर्षीय हादी ढाका-8 सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। वह भारत और शेख हसीना दोनों के मुखर आलोचक रहे।

उनकी मौत की खबर फैलते ही गुस्सा सड़कों पर उतर आया। प्रदर्शनकारियों ने हादी के नाम के नारे लगाए। उन्होंने न्याय की मांग की। उन्होंने आंदोलन जारी रखने की कसम खाई। हालात को देखते हुए प्रशासन ने कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए।

इसके बावजूद हिंसा नहीं रुकी। ढाका में गुस्साई भीड़ ने प्रमुख मीडिया संस्थानों को निशाना बनाया। प्रदर्शनकारियों ने ‘प्रोथोम आलो’ और ‘डेली स्टार’ के दफ्तरों में आग लगा दी। उस समय कर्मचारी इमारत के अंदर मौजूद थे। भीड़ ने सड़कों को जाम कर दिया। इससे दमकल गाड़ियों को पहुंचने में देरी हुई। कई घंटे बाद आग पर काबू पाया गया। कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

प्रदर्शनकारियों ने इन अखबारों पर भारत समर्थक होने का आरोप लगाया। उनका गुस्सा सीधे शेख हसीना के भारत में रहने से जुड़ा दिखा। यह नाराजगी अब खुलकर भारत विरोधी रुख में बदलती नजर आई।

हिंसा यहीं नहीं रुकी। ढाका में प्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्था छायानट के परिसर में तोड़फोड़ हुई। उपद्रवियों ने वहां आग भी लगाई। उत्तर-पश्चिमी जिले राजशाही में प्रदर्शनकारियों ने बुलडोजर से अवामी लीग के कार्यालय को गिरा दिया। कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिए।

चटगांव में हालात और गंभीर हुए। वहां भीड़ ने भारतीय सहायक उच्चायोग पर हमला किया। उन्होंने पत्थर फेंके और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की। पास ही एक पूर्व अवामी लीग शिक्षा मंत्री के घर में आग लगा दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को खदेड़ा।

इसी बीच, बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान के घर को फिर निशाना बनाया गया। यह घर पहले भी फरवरी और अगस्त में हमलों का शिकार हो चुका है। इस बार भी उपद्रवियों ने आगजनी और तोड़फोड़ की।

हादी की मौत के बाद भारत विरोधी प्रदर्शन और तेज हो गए। चटगांव में भारतीय मिशन के बाहर प्रदर्शनकारियों ने धरना दिया। उन्होंने हादी की हत्या को लेकर नारे लगाए। साथ ही अवामी लीग और भारत के खिलाफ भी नारेबाजी की। पुलिस ने समय रहते हालात संभाले।

सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को राजकीय शोक दिवस घोषित किया। पूरे देश में झंडे आधे झुकाए गए। विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन किया गया।

इस बीच, मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने देर रात राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने हादी की मौत को बेहद दुखद बताया। उन्होंने हत्यारों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, उन्होंने जनता से संयम बरतने और जांच एजेंसियों को काम करने देने की अपील की।

फिलहाल, बांग्लादेश में हालात नाजुक बने हुए हैं। चुनाव से पहले यह संकट देश की राजनीति और कूटनीति दोनों के लिए बड़ी परीक्षा बनता दिख रहा है।


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